वीरेन्द्र दत्त/फुलपरास(मधुबनी)
बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के घर में स्मार्ट मीटर लगाने के मामले में राज्य को अग्रणी बताकर विभाग चाहे जितनी भी अपनी पीठ थपथपा ले उपभोक्ताओं को यह रास नहीं आ रहा है। नतीजतन गांव-गांव और शहर-शहर इसका विरोध शुरु हो चुका है। विगत शुक्रवार को अंधराठाढ़ी के रुद्रपुर थाना अंतर्गत महरैल गांव में स्मार्ट मीटर लगाने गये बिजली कर्मिर्यों और ग्रामीणों के बीच घटित घटना क्या नजरअंदाज करने वाली है ? थाने में दोनों ओर से मामला दर्ज होने की चर्चा है। स्मार्ट मीटर जब इतना ही अच्छा और गुणात्मक है तो फिर उपभोक्ताओं के द्वारा रोज रोज की परेशानियों का बखान और इसका प्रतिरोध क्या कोई मायने नहीं रखता ? बिजली आपूर्ति प्राप्त करने के लिए क्या अब उपभोक्ताओं को मुकदमा लड़ कर उर्जान्वित बिहार के सपनों को साकार करना होगा ? यह एक यक्ष प्रश्न है जो स्मार्ट मीटर लगाने को लेकर घट रही घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में उठता दिख रहा है। सामान्य सी बात है कि अच्छे उत्पाद ग्राहकों के बीच स्वतः लोकप्रिय हो जाते हैं। फिर इसके लिए जोर जबरदस्ती करने का क्या औचित्य है ? जिन लोगों के यहां स्मार्ट मीटर लगा भी है उनकी आपबीती सुनकर लोग और अधिक परेशान हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि उपभोक्ताओं को इसके लिए स्मार्ट फोन रखना आवश्यक होगा ताकि इसे रिचार्ज किया जा सका। पैसा खतम और बिजली बंद वाले इस मीटर के बारे में पीड़ित उपभोक्ताओं का कहना है कि रिचार्ज करने के बाद कभी आठ दस घंटे तक भी सप्लाई चालू नहीं होता। जिसको देखने वाला कोई नहीं मिलता। लोगों का कहना है कि जब दिल्ली मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों तक में अब तक स्मार्ट मीटर नहीं लगाया गया है तो बिहार की बिजली कंपनियाॅ और सरकार क्यों उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर के परेशानियों की ओर धकेलने पर आमदा है।विभागीय आला अधिकारीगण भले ही यह कहते सुने जा सकते हैं कि सरकार ने उपभोक्ताओं के बिल में गड़बड़ी की लगातार आ रही शिकायतों के मद्देनजर यह कदम उठाया है परंतु दबी जुबान में स्मार्ट मीटर को उपभोक्ताओं के सिर जबरन थोपने वाला कदम भी बता रहे हैं। जानकारों की माने तो स्मार्ट मीटर लगाने से पहले बिजली विभाग को अपनेे आधारभूत संरचना के साथ साथ अधिकारियों एवं कामगारों को भी स्मार्ट बनाना होगा। बोर्ड से कंपनी बनने के बाद विभाग में जिस तरह कार्य क्षमता में वृद्धि हुई थी वह अब कुंद पड़ती दिख रही है। जर्जर तार और सिमेंट के वैसे कमजोर पोल जो आॅधी का एक झोंका तक बर्दाश्त नही कर पाते उसके बदौलत जनता के सिर स्मार्ट मीटर का ठीकरा फोड़ कर विभाग को जो फायदा होगा वह तो भविष्य के गर्भ में है परंतु इसका विरोध अब उग्र होता दिख रहा है। आज के समय में बिजली विलासिता नहीं लोगों के अपरिहार्य आवश्यकताओं में शामिल है। गरीबों के झोपड़ी से लेकर हर आम और खास लोगों के लिए बिजली आवश्यक जरुरतों के लिस्ट में शुमार है।बिजली विभाग द्वारा उपभोक्ताओं के घर जबरन लगाये जा रहे स्मार्ट मीटर को लेकर भी लोग उद्वेलित हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि बिजली विभाग में मानव कार्यबल को घटाने,लोगों को इलेक्ट्रोमैगनेटिक वेव और रेडियो फ्रिक्वेंसी की परिधी में लाने,उसके निजता के अधिकार पर दखल देने आदि के उद्येश्य से स्मार्ट मीटर लगाकर राज्य की जनता को तंगो तबाह किये जाने का यह कुचक्र है। स्मार्ट बनने का अंधानुकरण कहीं हमें गर्त में न ले जाय लोगों को यह अंदेशा भी सता रहा है। हाल फिलहाल शिक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा विद्यालयों में बेंच,डेस्क,थाली,सवमर्शिबुल बोरवेल,कंम्प्यूटर एवं आपूर्ति किये गये अन्य सामानों का मामला लोग देख सुन रहे हैं। कैसे शिक्षकों को भयातुर कर स्कूलों में इन घटिया सामानों को ठूॅस दिया गया। अब जाॅच होने की बात बताई जा रही है। तो क्या बिजली विभाग की स्थिति भी कमोबेश वही होने वाली है।

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