मिथिलांचल में वोटर अधिकार यात्रा की आकर्षण का केंद्र रही सांसद प्रियंका गांधी।
90 के दशक से पहले मिथिलांचल में कहा जाता था कि कतबो करबै बाप रे बाप तैयो जीततै हाथे छाप। मतलब साफ है कि मिथिलांचल में कांग्रेस की जड़ें बहुत मजबूत थी। सुपौल को मुख्यमंत्री का गांव कहकर पुकारा जाता था। तीन बार के मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र यहीं के रहने वाले थे। वर्ष 1985 में कांग्रेस मधुबनी के सभी 11 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। कमोवेश इसी तरह का परिणाम सुपौल और दरभंगा में दिखा था।

ब्राह्मण दलित और अल्पसंख्यक समाज तो शत प्रतिशत कांग्रेस के साथ था हीं अन्य वर्गों में कांग्रेस मजबूत स्थिति में थी। लेकिन 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव का उदय होता है और इसी के साथ कांग्रेस का पतन होने लगता है। नतीजा है कि कभी कांग्रेस का गढ़ रहे मिथिलांचल में कांग्रेस शून्य पड़ आ जाती है। कांग्रेस को इस हाल में लाने के लिए सिर्फ लालू और भाजपा हीं नहीं कांग्रेस खुद गुनहगार है। कांग्रेस लालू प्रसाद यादव की पिछलग्गू बन कर रह गई और प्रदेश कांग्रेस के नेता लालू प्रसाद यादव की हांजी हांजी करने लगे। नतीजा हुआ कि देश की सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी बिहार में सिकुड़ती चली गई। कांग्रेस के वोटर भाजपा जदयू और राजद में चले गए। यह तमाशा 35 वर्षों से चलता आ रहा है। लेकिन आगामी बिहार विधानसभा चुनाव को कांग्रेस पार्टी गंभीरता से लड़ने के लिए कमर कस ली है। राहुल प्रियंका बिहार में केन्द्र सरकार और चुनाव आयोग के वोट चोरी के खिलाफ यात्रा पर हैं। इस यात्रा में 35 साल बाद कांग्रेस का लाखों तिरंगा झंडा सड़क पर दिखा। राहुल प्रियंका पिछले मंगलवार बार को सुपौल मधुबनी और दरभंगा में वोटर चोरी न्याय यात्रा लेकर पहुंचे थे।

राहुल प्रियंका की यात्रा इन तीन जिलों में दो दिनों तक रही। कांग्रेस के लाखों नये पुराने नेता कार्यकर्ता सड़क पर उतर गये । प्रियंका गांधी इस यात्रा में आकर्षण का केंद्र बनी रही। राहुल प्रियंका ने मिथिलांचल में सुस्त पड़ी कांग्रेसियों में जान फूंक कर चली गई। राहुल प्रियंका समझ चुके हैं कि बिहार में कांग्रेस तभी उठ पायेगी जब पुराने गढ़ रहे मिथिलांचल को साधा जायेगा । इसीलिए प्रियंका गांधी को सुपौल मधुबनी और दरभंगा की यात्रा में लाया गया था। प्रियंका ने अपने दमदार भाषण से मिथिलांचल में एक बड़ी लकीर खींच दी है। बिहार प्रदेश कांग्रेस की नयी टीम की कार्यशैली की सिर्फ कांग्रेस ही नहीं सर्वत्र प्रशंसा हो रही है। कांग्रेस को मिथिलांचल में फूंक फूंक कर कदम बढ़ाना होगा और जमीन हकीकत को समझना होगा। दोनों भाई बहन के मिथिलांचल की धरती पर आने से कांग्रेस के साथ बड़े पैमाने पर लोग खासकर युवा और महिलाएं आगे आने लगे हैं। मंगलवार को मिथिलांचल का लोक पर्व चौठचनद था बावजूद इसके भुतहा से लेकर सकरी दरभंगा तक राहुल प्रियंका की एक झलक पाने के लिए लाखों लोग बेताब दिखे। कांग्रेस के नेता कार्यकर्ता हीं नहीं सेवा दल युवा कांग्रेस महिला कांग्रेस सभी व
विंग सक्रिय दिखी। प्रियंका राहुल की यात्रा को सफल होते हुए देख एनडीए गठबंधन की नींद मिथिलांचल में उड़ गई है। इस यात्रा से चुनाव पर कितना असर पड़ेगा यह तो नहीं पता लेकिन मिथिलांचल में राहुल प्रियंका कांग्रेस में जान फूंक दी है।

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