खजौली विधानसभा का भूगोल भी परिसीमन के बाद बदल गया है। अब इस विधानसभा में तीन प्रखंड खजौली जयनगर और बासोपट्टी शामिल है। यहां से वर्तमान भाजपा विधायक अरुण शंकर प्रसाद हैं। अरुण शंकर प्रसाद भाजपा के कर्मठ और निष्ठावान नेता माने जाते हैं। इतना हीं नहीं ये सदन में भी क्षेत्रीय समस्या को लेकर आवाज बुलंद करते रहते हैं। जहां तक खजौली विधानसभा में विकास की बात है तो यह विधानसभा सभा भी क्षेत्रीय समस्याओं पर आंसू बहाता आ रहा है। यहां भी बाढ़ और सुखार से किसानों को हर वर्ष जुझना पड़ता है। दरभंगा से जयनगर और सीमा सुरक्षा सड़क तो अच्छी स्थिति में है लेकिन ग्रामीण सड़कों की स्थिति खराब होती जा रही है। शिक्षा के नाम पर जयनगर डीबी कालेज एक मात्र अगीभूत ईकाई है। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा यहां भी भगवान भरोसे चल रहा है। स्वास्थ्य की सुविधा इस क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। गंभीर बीमारी का ईलाज यहां असंभव है। खजौली विधानसभा क्षेत्र के 75 प्रतिशत से अधिक लोग खेती पर आश्रित हैं। खेतीहर मजदूर रोजी रोटी के तलाश में गांव से महानगर की ओर पलायन कर चुके हैं। उद्योग धंधा नहीं रहने से बेरोज़गारी सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है। वहीं पेयजल जलजमाव और जाम की समस्या से इस क्षेत्र के लोग खासे परेशान दिखते हैं। जयनगर सीमावर्ती बाजार तो है लेकिन यहां की नारकीय स्थिति को दूर करने का कोई पहल विधायक अरुण शंकर प्रसाद जी द्वारा नहीं होने से लोगों में गुस्सा चरम पर है। कमोवेश यही हाल खजौली और बासोपट्टी बाजार का है हल्की बारिश में हीं ये दोनों प्रखंड मुख्यालय नड़क में तब्दील हो जाता है। सरकारी योजनाओं में यहां लूट मची हुई है तो भ्रष्टाचार चरम पर है। तस्करी तो यहां वर्षों से होता आ रहा है इन दिनों इस क्षेत्र में शराब बंदी कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है। खजौली विधानसभा क्षेत्र में सर्वत्र अराजकता का माहौल व्याप्त है। दुःखद पहलू ये है कि विधायक अरुण शंकर प्रसाद इसे रोकने में बिल्कुल असफल हैं। प्रखंडों में लूट मची है तो इस क्षेत्र की पुलिस अपराध रोकने में फिसड्डी साबित हो चुकी है। जहां तक जातीय समीकरण की बात है तो खजौली विधानसभा क्षेत्र सर्वाधिक संख्या यादवों की है लेकिन अतिपिछड़ा मुसलमान कुशवाहा दलित और ब्राह्मण मतदाता भी अच्छी खासी संख्या में हैं। जात-पात का खेल हर चुनाव में जमकर होता है। इस क्षेत्र के लोग बताते हैं कि वर्तमान विधायक अरुण शंकर प्रसाद कोई भी बड़ा ऐसा काम इस में नहीं किया जिसे जनता याद रख सके। नतीजा है कि क्षेत्र में अपने विधायक के प्रति भारी गुस्सा देखा जा रहा है। धर्म मजहब की बात इस क्षेत्र में हमेशा से होता आ रहा है। लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में जनता विकल्प तलाश रही है। पिछले तीन दशक से यहां के लोग जातीय झंझावातों में उलझकर उब चुकी है। विकास के लिए तरस रहा खजौली विधानसभा की राजनीति करबट बदलने को आतुर दिख रहा है। यहां भी आगामी विधानसभा चुनाव में चौंकाने वाला परिणाम हो जाय तो चौंकिएगा मत।

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