मधुबनी
कहते हैं जहां प्रेम संबंध अटूट हो वहां यादें इतनी बेहतरीन हो सकती है,जिसकी कल्पना कर पाना भी मुश्किल है.
रिश्ता तब और मजबूत हो जाता है जब दो भाइयों के बीच हो.
आज जो हम आपसे बताने वाले हैं,उसे पढ़कर आप निश्चित ही खुश होंगे.कहानी की शुरुआत वर्ष 2019 से होती है.
डॉ जगदीश मिश्रा जो एमएलएस कॉलेज, सरिसब-पाही से सेवानिवृत्त प्रोफेसर और प्रिंसिपल एवं मैथिली साहित्य के जाने-माने विद्वान हैं, ने अपने बड़े भाई डॉ गोविंद मिश्रा की याद में अपने गांव नबटोल में एक पुस्तकालय की स्थापना की.इस पुस्तकालय का नाम रखा गया “गोविंद मिश्र ग्रंथागार” यहां 10 हजार से अधिक अलग-अलग विधि की किताबें हैं.जिसे पाठक निशुल्क पढ़ते हैं और आनंद लेते हैं.

*कौन थे गोविंद मिश्र*
गोविंद मिश्र का जन्म 1937 में मिथिला (उत्तरी बिहार) के नबटोल में श्रोत्रिय ब्राह्मण मूल के एक पारंपरिक संस्कृत विद्वान परिवार में हुआ था। उनकी शैक्षणिक दीक्षा नबटोल के गाँव के प्राथमिक विद्यालय में हुई,आगे उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने न्यूयॉर्क के कोलंबिया विश्वविद्यालय को चुना,जहां कानून विधि की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद 1969 में दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय में व्याख्याता के रूप में शामिल हुए.1972 में उन्हें कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा छात्रवृत्ति प्रदान की गई और वहां एलएलएम पूरा करने के बाद वे 1973 में दिल्ली लौट आए.उनकी प्रमुख कृति, “भारत में गोपनीयता का अधिकार”, अपनी तरह की पहली कृति है, जो भारत में गोपनीयता के अधिकार के लिए कानूनी सुरक्षा उपायों को उजागर करने के लिए प्राचीन, मध्यकालीन और समकालीन भारतीय कानूनी प्रणालियों की आलोचनात्मक जाँच करने का प्रयास करती है, साथ ही इस अधिकार का उदाहरण देते हुए इसे भारतीय संस्कृति और परंपरा के हिस्से के रूप में आंकती है. कानून के छात्र के रूप में उनकी मुख्य रुचियाँ संवैधानिक कानून, पर्यावरण कानून और न्यायशास्त्र हैं.दर्शन और शास्त्रीय साहित्य भी उन्हें आकर्षित करते हैं.
*अब पुस्तकालय के बारे में*
यह पुस्तकालय “गोविन्द मिश्र स्मारक ग्रंथागार” के नाम से प्रसिद्ध है, जिसमें दस हजार से अधिक पुस्तकें हैं.इसमें कानून, इतिहास, समाजशास्त्र, संस्कृत, मैथिली, हिंदी और बांग्ला साहित्य, लोक संस्कृति आदि के कई बहुमूल्य संग्रह हैं.ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित यह पुस्तकालय शोधकर्ताओं, जिज्ञासु पाठकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों को समर्पित है और इस संस्था का उद्देश्य उनकी राह को सुगम बनाना है.
डॉ. अनुराग मिश्रा, जो इतिहास के शोधकर्ता और युवा लेखक हैं, वर्तमान में इस पुस्तकालय का प्रबंधन कर रहे हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि भविष्य में इस पुस्तकालय को डिजिटल प्लेटफॉर्म या किसी अन्य तरीके से कैसे उन्नत किया जा सकता है.ग्रामीण परिवेश में संचालित इस पुस्तकालय में रोजाना बुद्धजीवियों की भीड़ लगती है,सुबह के 10 बजे से शाम 5 बजे तक और 7 बजे से रात्रि के 9 बजे तक यहां विधिपूर्वक किताबें पढ़ी जा सकती है.

रन फॉर सोल्जर्स” मिनी मैराथन का आयोजन 12 अक्टूबर को, सम्मान और सलाम फाउंडेशन की ओर से विशेष पहल !
हनुमान चालीसा पर मधुबनी पेंटिंग उकेरने वाले कलाकार ने किया अद्भुत चमत्कार
जिलाधिकारी ने प्राप्त शिकायतों के आलोक में वर्चुअल माध्यम से जुड़े संबंधित पदाधिकारियों को जन शिकायतों को सर्वाेच्च प्राथमिकता में रखकर त्वरित निष्पादन करने का दिया निर्देश
वाहन चेकिंग के दौरान मनपौर गांव के 2 युवक हथियार व जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार
जिलाधिकारी आनंद शर्मा द्वारा अपने क्षेत्र भ्रमण के क्रम में औचक निरीक्षण, इजरायलपुर में मत्स्य विभाग के प्रस्तावित केंद्र का निरीक्षण
मतदाता सूची पुनरीक्षण का विरोध अलोकतांत्रिक : अशोक सहनी