
मधुबनी | जिले का एक मात्र अंगीभूत महिला कॉलेज है जिसकी समस्याएं कम होने की बजाय बढता ही जा रहा है। कॉलेज की प्रधानाचार्य डॉ मीना प्रसाद है जो समस्तीपुर से आती-जाती हैं। कॉलेज में गर्ल कामन रूम नहीं है। हालांकि हाल में एक कमरे में कॉमन रूम का बोर्ड लगाया गया है लेकिन यह दिखाने मात्र के लिए है। यहां छात्राओं के लिए खेल सामग्री या अन्य सामग्री का अभाव बना है।यहां तक कि समाचारपत्र, शौचालय तक नहीं है। किसी भी दृष्टि से यह कॉमन रूम लगता ही नहीं हैं।
छात्राओं के पेयजल के लिए लगाए गए तीन आरओ, एक वाटर कूलर खराब है। कालेज में छात्राओं के लिए एनसीसी का गठन नहीं हो सका है। कालेज में एनसीसी की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके लिए निर्धारित कमरा में अन्य कार्य किए जाते है। अतिरिक्त कंप्यूटर, क्लर्क की कमी बनी है।
एक दशक से कालेज का वेबसाइट अपडेट नहीं
बता दें कि कालेज का वेबसाइट एक दशक से अपडेट नहीं हुआ है। कालेज की तमाम उप समितियों की बैठक नहीं हुई है। शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मियों का दैनिक हाजिरी प्रधानाचार्य के व्यक्तिगत ईमेल से विश्वविद्यालय को भेजा जाता है।उस पर प्रधानाचार्य समस्तीपुर से डाउन लोड कर उसपर हस्ताक्षर कर पुनः ईमेल के जरिए विश्वविद्यालय को भेजा जाता है। यहां तक कि प्रधानाचार्य डॉ मीना प्रसाद सप्ताह में दो-तीन दिन ही कॉलेज आती थी, लेकिन शिक्षा सचिव श्री के के पाठक के आने के बाद प्रतिदिन प्रधानाचार्य 11 बजे कॉलेज में आती हैं और 1.30 में कॉलेज से चली जाती हैं. इससे शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों की शाम की हाजिरी प्रधानाचार्य के व्यक्तिगत ईमेल पर समस्तीपुर भेजा जाता है और उसे डाउन लोड कर हस्ताक्षर कर उसे विश्वविद्यालय भेजती हैं।

विदित हो कि शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों की हाजिरी प्रतिदिन बायो मैट्रिक द्वारा बनाया जाता है और उसे ईमेल द्वारा विश्वविद्यालय भेजा जाना आवश्यक होता हैं। इसतरह प्रधानाचार्य विश्वविद्यालय को भी झांसा देती हैं इसका प्रमाण कॉलेज और प्रधानाचार्य का ईमेल है जो इस कथानक को प्रमाणित करता है।
कालेज में 11 वर्ष पहले आठ कंप्यूटर की खरीदारी हुई थी। महीनों से कंप्यूटर कक्ष खुला नहीं है। जिससे छात्राएं व शिक्षक इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। कंप्यूटर कक्ष में धूल की मोटी परत पड़ी हुई है।कालेज में इन्भर्टर का बैट्री नहीं है। इन्भर्टर का बैट्री लगाने की पहल नहीं हो रही है। कालेज में कोई जर्नल, पत्रिका नहीं मंगाया जाता है।
पुस्तकालय भवन हस्तगत करने की पहल नहीं
कालेज में पूर्व विधान पार्षद सुमन महासेठ द्वारा निर्मित पुस्तकालय भवन हस्तगत करने की पहल नहीं हो रही है। जिससे नए भवन में पुस्तकालय का संचालन नहीं किया जा रहा है। बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यूजीसी द्वारा कालेज के उत्तरी खंड के प्रथम तल का भवन निर्माण वर्षों से अधुरा पड़ा है। इसके लिए कालेज द्वारा विश्वविद्यालय से अनुमति लेने की पहल नहीं किया जा रहा है। जबकि इसके लिए कालेज में राशि उपलब्ध है। कालेज में कक्षों का अभाव है। पुराना कक्षा देख-रेख के अभाव में जर्जर हो रहा है। हाल ही में विधान पार्षद मदन मोहन झा और हाल मे जिले के अन्य विधायक द्वारा कॉलेज के विज्ञान संकाय के लिए प्रयोगशाला की सामग्री दी है। लेकिन वह सामग्री भी सही ढंग से वितरित नहीं हुई है, वह धूल चाट रहा है। पुरुष एवं महिला शिक्षकों शिक्षकेत्तर कर्मियों के लिए अपेक्षित नहीं है जो है उसकी भी सफाई नहीं हो रही है।
कालेज में कई विषयों के एक भी शिक्षक नहीं
कालेज की उदासीनता से कालेज के कई विषयों के शिक्षकों की कमी झेल रहा है। शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की पहल नहीं हो रही है। शिक्षकेत्तर कर्मियों का पद भी बड़ी संख्या में पद रिक्त है। वहीं जनवरी 2024 में करीब एक दर्जन शिक्षक अवकाश ग्रहण करेंगे। जिससे कई विषय शिक्षक विहीन हो जाएगा। रिक्त पदों पर प्रतिनियुक्ति के लिए कालेज द्वारा तीन साल से विश्वविद्यालय को पत्र नहीं भेजा गया है। जबकि विश्वविद्यालय द्वारा अतिथि शिक्षकों के माध्यम से रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों को भेजा जाता है लेकिन उसे सूचना तो मिले कि किस विषय में शिक्षकों की आवश्यकता है। रूटीन के अनुसार कालेज में प छात्राओं को वर्ग तक लाने की कोई पहल नहीं की जा रही है। प्रतिदिन झूठे प्रतिवेदन सरकार और विश्वविद्यालय को भेजा जाता है।

‘कालेज का आरओ, एक वाटर कूलर ठी कराया जा रहा है। शिक्षकों की कमी सहित कालेज की किसी भी तरह की शिकायत सामने आते ही उसे दूर कर दिया जाता है।’ कहते चलें कि स्थानीय विधायक एवं बिहार सरकार के मंत्री समीर महा सेठ ने विगत मार्च में एक सेमिनार के क्रम में कॉलेज का भ्रमण किया था। उन्होंने कहा था कि प्राचार्य यदि आवेदन देते हैं तो पूरे कॉलेज परिसर के ऊपरी मंजिल का मकान बना दूँगा लेकिन प्रधानाचार्य की तरफ से आज तक कोई आवेदन नहीं दिया गया।

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