-प्लाज्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है मलेरिया
-लक्षण दिखते ही स्वास्थ्य केंद्र भेजने की सलाह

वैशाली | सदर अस्पताल परिसर स्थित मलेरिया कार्यालय में मंगलवार को विभिन्न प्रखंड की आशाओं को मलेरिया पर प्रशिक्षित किया गया। प्रशिक्षक के रूप में जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ गुड़िया कुमारी ने बताया कि मलेरिया एक ऐसा रोग है जिसमें रोगी को सर्दी और सिरदर्द के साथ बार-बार बुखार आता है। इसमें बुखार कभी कम हो जाता है तो कभी दोबारा आ जाता है। गंभीर मामलों में रोगी कोमा में चला जाता है या उसकी मृत्यु तक हो जाती है। यह प्लाज्मोडियम नामक परजीवी के कारण होता है। मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से शुरू होता है जो इस परजीवी को शरीर में छोड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दक्षिण पूर्व एशिया के कुल मलेरिया मामलों में अकेले 77 प्रतिशत भारत में ही होते हैं।

पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अधिक खतरा
दूसरों के मुकाबले में जनसंख्या समूह पर मलेरिया का खतरा अधिक रहता है। इसमें शिशु पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और एचआईवी / एड्स के रोगी, साथ ही गैर प्रतिरक्षा प्रवासी, एक जगह से दूसरी जगह जाने वाले लोग और यात्री भी शामिल हो सकत हैं। अगर किसी को भी मलेरिया के लक्षण वाले मरीज मिले तो उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जरूर लाएं। प्रशिक्षण के दौरान आशा को एंटीजन किट से मलेरिया जांच की तकनीक भी बतायी गयी। मौके पर लैब टेक्नीशियन पुष्पांजलि कुमारी, रविन्द्र तिवारी, भीडीसीओ प्रीति आनंद, राजीव कुमार एवं राकेश कुमार मौजूद थे।

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