बिहार में इन दिनों राजनीति नहीं भयंकर कुटनीति चल रही है समझने वाले समझ रहे हैं। भाजपा नीतीश कुमार को घेरने के लिए चारों ओर से तैयारी में जुट गई है। केन्द्र सरकार की सेहत पड़ कोई असर नहीं पड़े इसलिए भाजपा फुंक फुंक कर कदम बढ़ा रही है। भाजपा यह चाहती है कि नीतीश कुमार को बिहार में इतना कमजोर कर दो कि इनके पास निकलने का कोई रास्ता ही नहीं बचे। इसलिए मंत्री ललन सिंह और सांसद संजय झा जो नीतीश कुमार के दायें हाथ माने जा रहे हैं इन्हें केन्द्र की भाजपा सरकार खूब तरजीह दे रही है।

इतना ही नहीं जदयू के जीते हुए बारह सांसदों पर भी भाजपा डोरा डाल रही है। इधर मुख्यमंत्री के चेहते पदाधिकारी संजीव हंस को ईडी इस कदर घेर ली है कि बिहार सरकार को कुछ समझ में हीं नहीं आ रहा है। अगर राज्य सरकार इसके विरोध में मुंह खोलेगी तो बात और बिगड़ जायेगी और इसके छींटे मुख्यमंत्री तक भी पड़ सकती है । इसलिए बिहार सरकार को मुंह बंद रखने की हिदायत है। इस छापेमारी के पीछे बहुत बड़ी कहानी छीपी हुई है।अगर पर्दा उठा तो बिहार में बवंडर होना तय है।

दुसरी ओर जन सुराज का बिहार में जीतना कद बढ़ेगा नीतीश कुमार उतने कमजोर होते चले जायेंगे। इसकी संभावना बढ़ती जा रही है। प्रशांत किशोर नीतीश कुमार के नब्ज को पूरी तरह टटोल चुके हैं। इधर एक समय मुख्यमंत्री के सबसे चेहते पदाधिकारी रहे आरसीपी सिंह ने एक नई चाल चल दी है। उन्होंने भाजपा छोड़ एक नयी पार्टी बिहार में बनाने की घोषणा कर नीतीश कुमार का टेंशन बढ़ा दिया है। आरसीपी दशकों तक नीतीश कुमार के साथ साये की तरह रहे हैं और उनसे ज्यादा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कोई नहीं जान सकता है। खेला वे लोकसभा चुनाव से पहले ही करने वाले थे लेकिन नीतीश कुमार को इसकी भनक लग गई और वे आनन फानन में महागठबंधन छोड़ भाजपा के साथ आ गये नहीं तो आरसीपी इनका खेल बिगाड़ने हीं वाले थे।

वे जदयू में भले हीं आज नहीं हैं लेकिन संगठन और सरकार में आरसीपी के लोग बड़े पड़े हैं। अगर पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव में आरसीपी उतर गये तो जदयू को बड़ा नुक़सान होना तय माना जा रहा है। नीतीश और आरसीपी एक हीं जात और एक ही जिला के रहने वाले हैं। इसलिए कुर्मी समाज दुविधा में फंस गया है। वहीं भाजपा को केन्द्र की अपनी सरकार भी बचानी है और नीतीश कुमार को भी कमजोर करना है इसलिए भाजपा हर खेल अप्रत्यक्ष रूप से खेल रही है। प्रशांत किशोर अगर कह रहे हैं कि जदयू आगामी विधानसभा चुनाव में बीस सीटों पर सीमट जायेगी इसके पीछे बड़ा राज छुपा हुआ है। भाजपा का डर कहिए या भरोसा देने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हर दुसरे तीसरे दिन बोलते हैं कि अब कभी इधर उधर नहीं जायेंगे भाजपा के साथ हीं रहेंगे। ये बात मुख्यमंत्री वैसे नहीं बार बार बोलते हैं इसमें भी रहस्य छुपा है। जहां तक ईडी सीबीआई का सवाल है तो यह केवल संजीव हंस तक हीं नहीं रूकने वाला है अगर मुख्यमंत्री थोड़ा भी हाथ पांव भांजे तो ईडी सीबीआई और कदम बढ़ा सकती है। तब बिहार में क्या तमाशा होगा कहना आसान नहीं है। इसलिए भाजपा प्रदेश के अपने नेताओं पर लगाम लगा दी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ एक शब्द बोलना महंगा पड़ सकता है। लेकिन पिछले दरवाजे से भाजपा इस तरह खेल खेल रही है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार घीरते जा रहे हैं। हालांकि नीतीश कुमार वैसे ही बीस वर्षों से बिहार की गद्दी पर अंगद की तरह पांव नहीं जमाए बैठे हैं उनमें ऐसी काबिलियत है तभी यह संभव हो रहा है। अगर नीतीश कुमार को अपनों ने दगा नहीं दिया तो वे हर चक्रव्यूह से निकलना जानते हैं और चुनाव आते-आते नीतीश कुमार भी कोई बड़ा खेल कर सकते हैं जो पहले भी करते रहे हैं। आगे क्या हो गा यह तो नहीं पता लेकिन बिहार की राजनीति में शह मात का जबरदस्त खेल चल रहा है। थोड़ा इंतजार करिए बिहार की राजनीति में भूचाल आ सकता है।

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