आगामी विधानसभा चुनाव में इस बार बाबूबरही में होगा देखने लायक मुकाबला। बाबूबरही जो कभी समाजवादी नेता देवनारायण यादव और कांग्रेस के महेन्द्र नारायण झा का गढ़ रहा है वहां पिछले कई चुनावों से जदयू का कब्जा है। जदयू लगातार पूर्व मंत्री कपिलदेव कामत और उनके परिवार पर भरोसा करती आ रही है। अभी भी स्वर्गीय कपिदेव कामत की पुत्र वधू मीना कामत यहां जदयू विधायक हैं। लेकिन इस बार इसी दल में एक नहीं अनेक दावेदार ताल ठोकने को तैयार हैं। राजद भी देव नारायण यादव के बाद उनके हीं दामाद पूर्व विधायक उमाकांत यादव को मैदान में उताराती रही है। राजद भी प्रत्याशी बदलना चाहती है। जहां तक जन सुराज की बात है तो दल बनने के बाद ये भी बाबूबरही में दमखम से चुनाव लडने की तैयारी में है। मतलब साफ है कि बाबूबरही में इस बार आमने-सामने की नहीं त्रिकोणीय संघर्ष होना तय माना जा रहा है। जहां तक विधायक मीना कामत की बात है तो ये क्षेत्र से लेकर विधानसभा तक हाथ पैर खूब भांजती है लेकिन क्षेत्र में इनके कार्यकाल में कोई उल्लेखनीय कार्य आज तक नहीं हो सका है। नतीजा है कि विधायक मीना कामत से मतदाताओं की नाराजगी सातवें आसमान पर जा पहुंची है। बाबूबरही में सड़क तो बनी है लेकिन बाकी कोई काम नहीं हो पाया है। शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार पलायन की समस्या बड़ी चुनौती बन चुकी है। बाढ़ और सुखार से हर वर्ष यहां के किसान जुझते आ रहे हैं। रोजी रोजगार के लिए युवा दर दर का ठोकर खाते फिर रहे हैं। जलजमाव और पेयजल संकट बाबूबरही में बड़ा मुद्दा बनते जा रहा है। जहां तक जातीय समीकरण की बात है तो इस क्षेत्र में सर्वाधिक संख्या यादवों की है। लेकिन अति पिछड़ा मुस्लिम कुशवाहा दलित और ब्राह्मण मतदाताओं की भी अच्छी खासी संख्या है। जातीय गोलबंदी हीं यहां जीत हार का कारण बनता रहा है। लेकिन इस बार का नजारा कुछ अलग देखने को मिल सकता है। क्षेत्र के लोग सिर्फ विधायक से हीं नहीं जदयू राजद और भाजपा तीनों पार्टी से उब चुके हैं और कोई तीसरा विकल्प तलाशने में लग गए हैं। अगर ऐसा हुआ तो जातीय गोलबंदी टुट सकता है और जदयू राजद दोनों के लिए मुसिवत खड़ा हो सकता है। जन सुराज बाबूबरही में भी तेजी से पांव फैलाता जा रहा है। इस बार जिन नये प्रत्याशियों की चर्चा है उसमें भारती मेहता का नाम सबसे ऊपर है। भारती मेहता स्थानीय हैं और नीतीश कुमार के काफी करीबी मानी जाती है। काफी पढ़ी लिखी स्वभाव से सरल भारती मेहता जिला परिषद सदस्य और संस्कृत शिक्षा बोर्ड की चैयरमेन रह चुकी हैं। वर्तमान में ये जदयू महिला सेल की प्रदेश अध्यक्ष के साथ पाटी की कई जिम्मेदारी निभा रही हैं। क्षेत्र में भी इनकी पकड़ मजबूत है। राजद किसी युवा चेहरा को उतारने के फिराक में है । हो सकता है इस बार यहां यादव नहीं कोई अन्य समुदाय से राजद प्रत्याशी बनाए। जहां तक जन सुराज की बात है तो यह कोई चौंकाने वाला फैसला ले सकती है। वैसे चुनाव में अभी विलम्ब है लेकिन बाबूबरही में चुनावी विशात बिछने लगी है। सभी दलों में सह मात का खेल शुरू हो चुका है। होगा क्या यह तो नहीं पता लेकिन बाबूबरही विधानसभा का आगामी विधानसभा चुनाव रोचक हीं नहीं दिलचस्प होने वाला है। वर्तमान विधायक मीना कामत फिर से चुनाव मैदान में उतरी तो इनका राह इस बार आसान नहीं होने वाला है। इंतजार करिए बहुत ज
ल्द बाबूबरही विधानसभा की चुनावी तस्वीर दिखने लगेगा।

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