क्या आपको पता है बिहार कांग्रेस में क्या चल रहा है नहीं न आइए हम बताते हैं।विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद कांग्रेस बिहार में बहुत बड़ा परिवर्तन करने जा रही है। देश के चार राज्यों में विधानसभा चुनाव साल के पहले सम्पन्न होना है जिसमें जम्मू-कश्मीर और हरियाणा में तो चुनाव सम्पन्न हो चुका है महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव होना बाकी है। महाराष्ट्र और झारखंड चुनाव सम्पन्न होते ही बिहार कांग्रेस में भारी बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। स्वयं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी बिहार का बागडोर अपने हाथों में लेने जा रही है। दशकों से लालू प्रसाद यादव के दया पर जीने वाली बिहार कांग्रेस को अब इस दल दल से निकालने के लिए केन्द्रीय नेतृत्व अब शख्त निर्णय लेने में देर करने वाली नहीं है।

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार बिहार में अगले कुछ महिनों के अन्दर अब ओल्ड नहीं न्यू कांग्रेस दिखने लगेगा। कांग्रेस का बागडोर अखिलेश प्रसाद सिंह के हाथ में नहीं बल्कि कन्हैया कुमार सांसद पप्पू यादव रंजित रंजन सरीखे नये लोगों के हाथों में सौंपे जाने की तैयारी कर ली गई है। कांग्रेस अब लालू तेजस्वी की दया पर नहीं बल्कि अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती है। लालू प्रसाद यादव के कारण हीं बिहार में कांग्रेस की यह दुर्गति हुई है जिसे बिहार के लोग तो जानते ही हैं अब केन्द्रीय नेतृत्व को भी समझ आ गई है। आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बिहार में नये नेतृत्व के साथ काफी दमदार तरीके से चुनाव लड़ने का मन बना चुकी है। इसके लिए सबसे पहले कांग्रेस को बिहार में नेतृत्व परिवर्तन करना जरूरी है। लालू प्रसाद यादव के हां में हां मिलाने वाले नेताओं के लिए कांग्रेस में कोई जगह नहीं रहने वाली है। अब वैसे युवा और लड़ाकू चेहरा कांग्रेस का बागडोर संभालने जा रहे हैं जो लालू प्रसाद यादव से झुक कर नहीं बल्कि आंखें तरेर कर बातें करेंगे। लालू प्रसाद यादव के कारण ही कन्हैया कुमार पप्पू यादव और न जाने कितने युवा चेहरा बिहार से बाहर कर दिए गए हैं। बिहार के लोग खासकर बाह्मण मुसलमान और दलित जो कभी कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक था उसे फिर से वापस लाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बिहार के लोग भी राहुल गांधी को आशा भरी निगाहों से देखने लगे हैं। कांग्रेस के साथ युवा महिला और आम सर्वहारा वर्ग जूड़ना तो चाहते हैं लेकिन इन्हें डर लगता है कि कांग्रेस तो बिहार में लालू प्रसाद यादव की कठपुतली है। इस मिथक को तोड़ने के लिए कांग्रेस स्वार्थी नेताओं से पिंड छुड़ाना चाहती है। वह तभी होगा जब बिहार का बागडोर कन्हैया कुमार पप्पू यादव रंजित रंजन जैसे नेताओं के हाथों में होगा। चुनाव खत्म होते हीं प्रियंका गांधी बिहार की ओर मुखातिब होंगी और पुराने चेहरे को बदल कर नेतृत्व नये लोगों के हाथों में देंगी।

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राहुल और प्रियंका का लगातार बिहार में दौरा होने जा रहा है। मुस्लिम और दलित समुदाय के साथ स्वर्ण मतदाताओं पर इस बदलाव से बहुत असर पड़ने की संभावना है। लेकिन इसके लिए कांग्रेस के केन्द्रीय नेतृत्व को इन्हें भरोसा में लेना होगा। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ जो बर्ताव हुआ उससे हर सच्चे कांग्रेसी तो आहत तो है हीं सम्पूर्ण बिहार के लोग हतप्रभ रह गए। लेकिन इस अपमान और मनमानी के लिए सिर्फ लालू प्रसाद दोषी नहीं कांग्रेस स्वयं दोषी है नहीं तो कांग्रेस को बिहार में बेहतर नतीजा मिलता। देखते रहिए अगले कुछ महीनों में बिहार कांग्रेस का सूरत बदला हुआ दिखेगा। बिहार कांग्रेस का ब्लू प्रिंट तैयार हो चुका है बस थोड़ा इंतजार कर लें।

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