By SHRI RAM SHAW
नई दिल्ली। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने जनता से राष्ट्र की एकता और अखंडता को चुनौती देने वाले असामाजिक तत्वों से सचेत रहने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है कि जिन लोगों ने 1947 में विभाजन की मांग की थी, उनमें से 95 प्रतिशत आज भी भारत में हैं, जो राष्ट्र की एकता और अखंडता को चुनौती दे रहे हैं।
वह दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आरएसएस के दिग्गज नेता लक्ष्मीनारायण भाला द्वारा लिखित ‘संविधान की जन्मकथा’ नामक पुस्तक के विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि देश को क्षेत्र, धर्म, जाति और नौकरी में आरक्षण के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है। हमने प्रत्येक भारतीय नागरिक को समान अधिकार देने के लिए जम्मू-कश्मीर में धारा 370 को समाप्त कर दिया है। हमें इतिहास से यह समझना होगा कि किन परिस्थितियों में हम पर सदियों तक विदेशियों का शासन रहा, ताकि इसकी पुनरावृत्ति न हो सके।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता रामलाल ने कहा कि भारतीय संविधान की मूल भावना सबको साथ लेकर आगे बढ़ना है। राज्यसभा के पूर्व महासचिव योगेन्द्र नारायण ने भाला जी द्वारा लिखित पुस्तक के मुख्य बिन्दुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय संविधान पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल दिया। लक्ष्मीनारायण भाला ने वर्तमान संदर्भ में पुस्तक लिखने की आवश्यकता के बारे में बात की। समारोह का संचालन अमित जैन ने किया। इस अवसर पर सत्यनारायण जटिया, शूलपाणि सिंह और अन्य ने सभा को संबोधित किया।

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