कुमुद रंजन सिंह, पत्रकार
सतत जीविकोपार्जन योजना में कार्यरत रहे छंटनी ग्रस्त कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर राज्य स्तरीय टीम के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव लोकेश कुमार और माननीय मंत्री श्रवण कुमार को पत्र सौंपा है।
कर्मियों का कहना है कि वे पिछले 6 वर्षों से इस योजना में कार्यरत थे, जिनका चयन निजी कंपनी बंधन कोन्नगर के द्वारा किया गया था। उनकी मेहनत और प्रयासों से इस योजना को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। लेकिन अब फंड की कमी का हवाला देकर इन्हें नौकरी से बाहर कर दिया गया।
कर्मियों की शिकायत
- निजी कंपनी मनमाने तरीके से नए लोगों का चयन करवा रही है।
- अनुभवी और मेहनती कर्मियों को दरकिनार किया जा रहा है।
- लगातार पत्र लिखने के बावजूद अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
संघ का नेतृत्व
राज्य संघ के नेतृत्वकर्ता रस्मिता कुमारी, दिलीप कुमार यादव, सुजीत झा समेत अन्य कर्मियों ने बताया कि वे 1 सितंबर 2025 से लगातार अपनी मांगों को पत्राचार के माध्यम से सरकार के समक्ष रख रहे हैं।
लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो सभी ने विवश होकर 10 सितंबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दिया है।
कर्मियों की प्रमुख माँगें
- तत्काल नौकरी में वापसी।
- हटाए जाने की तिथि से बकाया वेतन का भुगतान।
- बिहार सरकार की HR Policy का लाभ।
- बीमा कवर की सुविधा।
- BRP/BIC कर्मियों की सेवा अवधि 60 वर्ष तक सुनिश्चित की जाए।
कर्मियों का आरोप
कर्मियों ने कहा कि सरकार एक ओर रोजगार देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उनके जैसे हजारों लोगों से रोजगार छीनकर उन्हें बेरोजगार बना रही है।

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