मधुबनी – लोक आस्था और परंपरा का प्रतीक पर्व चौठचन्द को लेकर पूरे शहर का माहौल भक्तिमय हो गया है। जैसे-जैसे पर्व का दिन नजदीक आ रहा है, लोगों की तैयारियाँ भी तेज हो गई हैं। घर-घर में पूजा की विशेष सजावट की जा रही है और महिलाएँ उत्साहपूर्वक इस व्रत की तैयारी में जुटी हैं। जिले भर में 26 अगस्त को मनाए जाने वाले चौठचंद्र को लेकर बाजारों की रौनक बढ गई। जहां लोग कभी बारिश तो कभी गर्मी से परेशान होकर घरों में दुबके रहते थे। जिस कारण बाजार में चहल-पहल कम देखने को मिल रहा था। वही रविवार को चौठचंद्र पर्व को देखते हुए बांस निर्मित , मिट्टी के बर्तन आदि समान की खरीदारी को लेकर लोगों की भीड़ देखी गई। जिस कारण एक बार फिर बाजारों में रौनक लौटती दिखी।
ऐसा मानय्त है कि चौठचंद्र पर्व की उत्पति भगवान गणेश व चन्द्रमा की कथा से जुड़ी है।कहा जाता है कि एक बार भगवान गणेश कहीं जाते समय गिर पड़े और चंद्रमा ने उनका उपहास किया। इससे क्रोधित होकर गणेश ने चंद्रमा को श्राप दिया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को जो भी व्यक्ति तुम्हारा दर्शन करेगा, उस पर चोरी या झूठ का कलंक लगेगा।
ऐसे तो चौठ चंद्र को लेकर कई तरह के किस्से है। उन्ही में से एक किस्सा यह है कि पुरातन मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दौरान चंद्रमा को कलंक लगा था, इसीलिए इस दिन चांद को देखना पूरी तरह से मना किया जाता है। बाकी त्योहारों की तरह त्यौहार भी अलग-अलग मान्यताओं से परिपूर्ण है। मिथिला में बहुत प्राचीन मान्यता है कि जब चन्द्र्मा,गणेश का विचित्र रूप को देखकर हँसने लगे तो गणेश ने श्राप दिया कि जिस सुंदरता पर तुम्हें घमंड है आज के बाद तुम्हारी सुंदरता छीन्न होने लगेगी,यह बात सुनते ही चंद्रदेव का अभिमान खत्म हो गया और वह भगवान गणेश के सामने क्षमा मांगने लगे।
बाजारों में रौनक
चौठचन्द के अवसर पर बाजारों में खास चहल-पहल देखी जा रही है। पूजा सामग्री की दुकानों पर सुबह से ही भीड़ लगी रही। केले, नारियल, धूप, दीपक, प्रसाद सामग्री, कलश एवं श्रृंगार के सामान की खूब खरीदारी हो रही है। मिठाइयों की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ देखने को मिल रही है।

आस्था और परंपरा
मान्यता है कि चौठचन्द व्रत विशेषकर संतान की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की मंगलकामना के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएँ व्रत रखकर भगवान गणेश और चंद्रदेव की आराधना करती हैं। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।

श्रद्धा में डूबा वातावरण
पूरे शहर और ग्रामीण इलाकों में भी चौठचन्द का उल्लास देखने को मिल रहा है। घर-घर में पूजा की थाली सजाई जा रही है। बच्चे और बुजुर्ग भी इस परंपरा में बराबर की भागीदारी निभा रहे हैं। मोहल्लों और गलियों में गहमा-गहमी का माहौल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि परिवार और समाज में आपसी एकता एवं प्रेम का संदेश भी देता है।

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