दरभंगा। दिनांक 14 सितंबर 2025 को म. अ. रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय, दरभंगा के सभागार में पोथीघर फाउंडेशन एवं महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित द्वादश व्याख्यानमाला की श्रृंखला में “भारतीय दर्शन के विकास में मिथिला का योगदान” विषय पर ग्यारहवाँ व्याख्यान ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं साहित्यकार प्रो. अमरनाथ ने दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. दिनेश झा ने की।
मैथिल परंपरा के अनुरूप व्याख्यान प्रारंभ होने से पहले वक्ता प्रो. अमरनाथ को डॉ. कृष्णानंद मिश्र तथा अध्यक्ष को फिल्मकार सुमित सुमन द्वारा पाग-दोपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया।
अपने व्याख्यान में प्रो. अमरनाथ ने भारतीय दर्शन में मिथिला के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि –
“भारतीय दर्शन का सार तत्व मिथिला के संपूर्ण दर्शन में निहित है। ‘बृहदारण्यक उपनिषद’ में याज्ञवल्क्य-मैत्रेयी संवाद के अंतर्गत यह संदर्भित है कि भौतिक विषयों की अपेक्षा आत्मतत्व की खोज अधिक महत्वपूर्ण है। नश्वर वस्तुओं की बजाय ‘आत्मा’ का विवेचन होना चाहिए, क्योंकि आत्मा ही अमरत्व प्रदान करती है। मिथिला की धरती के कण-कण में दर्शन व्याप्त है। यहाँ का बालमन भी इससे अछूता नहीं है।”
उन्होंने आगे कहा कि मिथिला की दार्शनिक परंपरा में भवनाथ मिश्र ‘अयाची मिश्र’ और उनके पुत्र शंकर मिश्र का योगदान उल्लेखनीय है। वहीं दार्शनिक वाचस्पति मिश्र द्वारा ब्रह्मसूत्र पर लिखी गई टीका ‘भामती’ आज भी प्रसिद्ध है, जो उन्होंने अपनी पत्नी भामती और गुरु को समर्पित की थी। वाचस्पति मिश्र ने ‘तत्त्वमीमांसा’ का प्रतिपादन किया। इसके बाद ‘नव्य मीमांसा’ का विकास हुआ जिसके प्रणेता गंगेश उपाध्याय थे। उनकी रचना ‘तत्त्वचिंतामणि’ में गहन तत्त्वमीमांसा का विवेचन मिलता है।
व्याख्यान के पश्चात संक्षिप्त प्रश्नोत्तर सत्र हुआ जिसमें समयाभाव के कारण केवल एक प्रश्न ही पूछा जा सका, जिसका उत्तर प्रो. अमरनाथ ने दार्शनिक अंदाज में दिया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. दिनेश झा ने कहा कि –
“भारतीय दर्शन में मिथिला से संबंधित सभी दर्शनों का महत्व निर्विवाद है। यहाँ के विद्वानों और दार्शनिकों ने अद्वितीय योगदान दिया है। आज का यह व्याख्यान हमारे लिए अत्यंत समृद्धिदायक रहा।”
कार्यक्रम के अंत में पोथीघर फाउंडेशन के नारे “लाइए व्यवहार में, पोथी उपहार में” के तहत डॉ. संजीत झा ‘सरस’ द्वारा वक्ता को तथा प्रकाश कुमार ‘छोटू’ द्वारा अध्यक्ष को पुस्तक उपहार स्वरूप प्रदान की गई।
संचालन आशुतोष मिश्र ने किया और धन्यवाद ज्ञापन पोथीघर फाउंडेशन के सचिव आनंद मोहन झा ने किया।
इस अवसर पर डॉ. विद्यानाथ झा, डॉ. त्रिलोक झा, डॉ. संजीत झा ‘सरस’, डॉ. मणिशंकर झा, राजनाथ पंडित, गुंजन कुमारी, देवचंद्र प्रसाद, अवध किशोर मिश्र, प्रकाश कुमार ‘छोटू’ सहित अनेक प्रोफेसर, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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