आर्थिक विकास की रफ्तार पर कांग्रेस को घेरा, कहा- जुलाई से सितंबर की तिमाही में भारत की विकास दर 7.6 प्रतिशत हुई
vijay shankar
पटना : भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार पर पूर्व विधान पार्षद व वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. रणबीर नंदन ने कांग्रेस को जमकर घेरा है। डॉ. नंदन ने कहा है कि जुलाई से सितंबर की तिमाही में भारत की विकास दर 7.6 प्रतिशत रही है जो अमेरिका, रूस, चीन सबसे आगे है। उन्होंने कहा कि भारत में जब भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है, आर्थिक सुधार नई उंचाई तक पहुंचे हैं। जबकि कांग्रेस की सरकार के वक्त अर्थव्यवस्था खस्ताहाल दौर में पहुंची है।
डॉ. नंदन ने कहा कि भाजपा के केंद्र में रहते हुए अर्थव्यवस्था बेहतर हुई है, इस बात को कांग्रेस भी नकार नहीं सकी है। 2004 में जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी तो वित्त मंत्री बने पी. चिदंबरम में ने 8 जुलाई 2004 को अपने बजट भाषण में कहा था कि ‘भारतीय अर्थव्यवस्था के आधार मजबूत दिखाई दे रहे हैं। अब चिंदबरम का तो भाजपा के साथ कोई लगाव रहा नहीं। लेकिन चिदंबरम भारतीय अर्थव्यवस्था के उन आंकड़ों को तो झुठला नहीं सकते थे, जो उन्हें श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के शानदार कार्यकाल के बाद विरासत में मिले थे। भाजपा ने 2004 में जब सत्ता छोड़ी तो विकास दर 8.5 प्रतिशत थी, जो कि 1975-76 के बाद सबसे अधिक थी।
जबकि कांग्रेस के 9 साल के शासन के बाद इन्हीं चिदंबरम ने 28 फरवरी 2013 को अपने बजट भाषण में कहा था “वैश्विक आर्थिक विकास दर 2011 में 3.9 प्रतिशत के बाद 2012 में 3.2 प्रतिशत पर आ चुकी है। हमारी अर्थव्यवस्था भी 2010-11 में सिकुड़ी है।”
डॉ. नंदन ने कहा कि नवंबर 2023 में जीएसटी संग्रह के 1.67 लाख करोड़ रुपए रहा है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 15 फीसदी अधिक है। भारत में आर्थिक तेजी हर दिन नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है और यह कांग्रेस के लिए कभी न पचने वाली बात है। लेकिन कांग्रेस हो या कोई और, आंकड़ों को कैसे झुठला सकते हैं। यह सच है कि 2023 में अप्रैल से नवंबर माह के बीच छह माह ऐसे रहे हैं जब देश में जीएसटी कलेक्शन 1.60 लाख करोड़ से अधिक रहा है। जबकि अन्य माह में भी जीएसटी संग्रह 1.57 लाख करोड़ से अधिक ही रहा है। पिछले सप्ताह देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 2.538 अरब डॉलर की वृद्धि रही है।
डॉ. नंदन ने कहा कि 10 साल की यूपीए की सरकार 10 बड़े घोटाले के साथ इतिहास में दर्ज है। कोयला घोटाला, टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला, चॉपर घोटाला, ट्रक घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, कैश फॉर वोट घोटाला, आदर्श घोटाला, सत्यम घोटाला, आईपीएल घोटाला और चीनी घोटाला। इनके अलावा भी छोटे मोटे घोटाले तो जैसे यूपीए सरकार में रोजमर्रा की चीजें थीं। इसी शर्मिंदगी में अब वे अपने गठबंधन का भी नाम यूपीए नहीं रख पा रहे हैं।

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