vijay shankar
पटना : महान स्वतन्त्रता सेनानी व देश के प्रथम गृहमंत्री सरदार पटेल की पुण्यतिथि के अवसर पर आज पटना की पूर्व उपमहापौर प्रत्याशी सीमा पटेल के नेतृत्व में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जदयू के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता श्री राजीव रंजन बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस अवसर पर अखिल भारतीय धानुक महासंघ के अध्यक्ष श्री शंकर प्रसाद, श्री अशोक मेहता, सपना, श्री कुंदन, गोनू ठाकुर, श्री अमित कुमार, श्री सुमित, श्री गोलू कुमार, श्री देवेन्द्र महतो, श्री राजू यादव आदि उपस्थित रहें।
इस अवसर पर सरदार पटेल को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्री राजीव रंजन ने सरदार पटेल को मां भारती का सच्चा सपूत बताया।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल राष्ट्रीय एकता व अखंडता के अग्रदूत और अखंड भारत के वह शिल्पकार थे जिनका ऋण देश कभी नहीं चुका सकता। यह उन्हीं की देन है कि ब्रिटिश हुकुमत और पाकिस्तान की सभी चालबाजियों के बावजूद कश्मीर से कन्याकुमारी तक हमारा देश एक है। उनका नाम हमेशा अमर रहेगा।
सरदार पटेल के कृतित्व को याद करते हुए उन्होंने कहा कि सन् 1947 में स्वतंत्र होने के बाद भारत 565 स्वतंत्र रियासतों में बंटा हुआ था। उस समय माउण्टबैटन ने भारत की आजादी को लेकर जो प्रस्ताव दिया था उसके मुताबिक सभी रजवाड़े अपनी इच्छानुसार या तो भारत या पाकिस्तान में विलय कर सकते थे या खुद को स्वतंत्र रख सकते थे। इनमें से कुछ रजवाड़ों ने पाकिस्तान के चक्कर में पड़ कर भारत को आँखे दिखानी चाही, लेकिन सरदार पटेल की कूटनीति और लौहनीति से बिना किसी युद्ध के अंततः सभी रजवाड़ों का भारत में सफलतापुर्वक विलय हो गया। इसीलिए उन्हें ‘‘भारत का बिस्मार्क’’ और ‘‘लौहपुरुष’’ भी कहा जाता है।
जदयू महासचिव ने कहा कि आजादी के वक्त देश के कलेजे पर चलने वाली बंटवारे की छुरियों ने सरदार पटेल के अंतर्मन को भी भेद दिया था। वैसी अवस्था में जब कोई भी राष्ट्रवादी संयत नहीं रह सकता था, सरदार पटेल ने न केवल अपने दुःख को दफन कर, जिस तरह से देश के एकीकरण की मुहिम को सफलतापुर्वक चलाया, वह आज भी एक मिसाल है। उनके समक्ष एक तरफ पाकिस्तान से आने वालों का बंदोबस्त करना, दूसरी तरफ दंगों पर नियंत्रण पाना और तीसरा बंटवारे के बाद शेष भारत को एक सूत्र में बांधने जैसे चुनौतियां खड़ी थीं। तीनों ही मोर्चों पर उन्होंने इतना प्रभावशाली काम किया कि हर भारतवासी उनका मुरीद बन गया।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का लक्ष्य एक मजबूत और संवेदनशील भारत का निर्माण करना था, जिसे पूरा करने के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना चाहिए। यही उन्हें हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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