इस बार आगामी विधानसभा चुनाव में मधुबनी में होगा देखने लायक मुकाबला । पिछले दो चुनावों से राजद का इस सीट पर कब्जा है। यहां से राजद के विधायक समीर महासेठ वर्तमान विधायक हैं। मधुबनी विधानसभा भी एक समय कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। लेकिन भाजपा के उदय के बाद यहां से चार बार रामदेव महतो विधायक रह चुके हैं। सामने कितने बड़े दिग्गज क्यों न रहे हों भाजपा के सामने वे टिक नहीं पाते थे। परिसीमन के बाद मधुबनी विधानसभा का भूगोल भी बदल गया। मधुबनी के साथ सम्पूर्ण पंडौल प्रखंड जो कभी विधानसभा हुआ करता था जूड़ गया। जहां तक जातीय समीकरण की बात है तो इस विधानसभा में सर्वाधिक संख्या ब्राह्मणों की है। मुस्लिम यादव अति पिछड़ा और दलित सहित कई मिश्रित जाति के लोग भी यहां अच्छी संख्या में है। मधुबनी नगर निगम के साथ रहिका प्रखंड का कुछ पंचायत और पंडौल प्रखंड मधुबनी विधानसभा में शामिल है। अगर विकास की बात करें तो इस विधानसभा में अनेक समस्याएं सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है। वर्तमान मधुबनी विधानसभा इकलौता विधानसभा ऐसा रहा है जहां एक नहीं दो चीनी मिल लोहट और सकरी इस इलाके के लिए बरदान हुआ करता था। जो अब इतिहास बनकर रह गया है। पंडौल सुता यहां से पलायन कर गया जहां सैकड़ों लोग काम करते थे आज भुखे मर रहे हैं। सकरी का चमड़ा और खपड़ा उद्योग तीन दशक पहले हीं बंद हो चुका है। जहां तक मधुबनी नगर निगम क्षेत्र की बात है तो यहां जल संकट सबसे बड़ी समस्या है। जलजमाव टुटी सड़कें जाम और जल निकासी नहीं होने से शहरवासियों में भारी आक्रोश है। शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और मंहगाई एक अलग गंभीर समस्या बनकर खड़ी है। एक भी कल कारखाने नहीं रहने से इस क्षेत्र के लोग भारी संख्या में शहर और गांव छोड़ महानगर की ओर पलायन कर चुके हैं। चुनाव के समय वादे तो खूब हुए लेकिन मधुबनी स्टेडियम जो तीन दशक से खंडहर में तब्दील हो गया आज तक इसका जिर्णोद्धार नहीं हो सका। दो दिन पहले इसके पुनर्निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हुई है।शहर से लेकर गांव तक यहां के लोग नारकीय जीवन जीने को विवस है। शहर में वर्षों से अति क्रमण एक भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। निगम के मेयर और विधायक अलग-अलग दलों से आते हैं नतीजा है कि दोनों में पहले जैसा आज केमेस्ट्री नहीं है। इसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है मतलब साफ है कि विकास बाधित है। कहीं कोई विकास कार्य नहीं हो रहे हैं।शहर में बड़े बड़े होटल रेस्त्रां कैफ़े और अट्टालिका तो बन गए लेकिन आम सर्वहारा की जिंदगी में कोई सुधार नहीं हुआ। जहां तक विधायक समीर महासेठ की बात है तो वे एक अच्छे इंसान जरूर हैं। लेकिन कुछ माह को छोड़ दें तो ये लगातार विपक्ष में रहे चाहकर भी क्षेत्र में बहुत अधिक विकास कार्य नहीं करा सके। नतीजा हुआ कि ये अपने विधानसभा के लिए दस वर्षों के दौरान कोई भी ऐसा बड़ा काम नहीं किया जिसे मधुबनी विधानसभा की जनता याद रख सके। मंत्री रहते हुए लोहट में इथेनाल बनाने वाली फैक्ट्री जिसकी चर्चा खूब हो रही थी वह भी ठंडे बस्ते में चला गया। जहां तक सरकारी योजनाओं की बात है तो जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड मुख्यालय तक इसमें लूट मची है। कोई भी ऐसा विभाग नहीं जहां खुलेआम रिश्वत न ली जाती हो। भ्रष्टाचार में यहां का हर विभाग आकंठ डुबा है और डीएम एसपी के नाक के नीचे यह गोरखधंधा चलता आ रहा है लेकिन किसी का इन पदाधिकारियों और कर्मचारियों पर अंकुश नहीं है। राजद विधायक समीर महासेठ से जनमानस में भारी असंतोष है। मधुबनी खादी ग्रामोद्योग जहां इनके उद्योग मंत्री बनने पर कुछ आस जगी थी इसमें भी कुछ नहीं हो सका। इनके प्रयास से सुन्दर मधुबनी बनाने के लिए चार वर्ष पूर्व नगर विकास से एक सौ तीन करोड़ नगर निगम को मिला था यह काम भी आज तक पूर्ण नहीं हो सका है। आगामी विधानसभा चुनाव में यहां घमासान मचना तय है। समीर महासेठ का चुनाव लड़ना करीब करीब फाइनल है लेकिन भाजपा से टिकट के लिए दर्जनों लोग अभी से कतार में हैं। होगा क्या यह तो नहीं जानते लेकिन मधुबनी में आगामी विधानसभा चुनाव बहुत आसान नहीं होने वाला है। यहां के लोग भी राजद भाजपा से उब चुके हैं और नये विकल्प के तलाश में हैं। अगर ऐसा हुआ तो विधायक समीर महासेठ का राह आसान नहीं होने वाला है और भाजपा का सपना चकनाचूर हो सकता है। जो भी हो मधुबनी विधानसभा जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों मतदाता शामिल हैं उनके सामने अंधेरा पसरा हुआ है। राजद चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है तो भाजपा यहां तरह तरह की कार्यक्रम चला रही है वहीं जन सुराज भी दस्तक देने देने लगा है। थोड़ा इंतजार करिए सब कुछ दिखने लगेगा।

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