तेजस्वी की सभा में चाहे भीड़ जितनी उमड़ रही हो, स्थानीय सांसद से क्षेत्र के लोग भले ही बेहद खपा दिख रहे हों लेकिन मुश्किल है मिथिलांचल में मोदी को हराना। मिथिलांचल में तकरीबन आठ से नो लोकसभा की सीट है। इन सभी सीटों पर भाजपा और जदयू का कब्जा है। चुनाव के शुरूआती दिनों में लग रहा था कि एनडीए गठबंधन की हालत इस बार पतली होने वाली है। लेकिन मोदी के आगमन और चुनाव नजदीक आते आते माहौल पूरी तरह बदलता नजर आ रहा है। मिथिलांचल के दो सीटों झंझारपुर और सूपौल में मतदान हो चुका है। चार सीटों दरभंगा समस्तीपुर उजियारपुर और बेगुसराय में चुनाव आज सम्पन्न हुआ है। सीतामढ़ी शिवहर और मधुबनी में बीस मई को मतदान है। इन सीटों में से कुछ सीटों पर कांटे का मुकाबला जरूर दिख रहा है लेकिन मतदान के दिन मतदाताओं का मूड बिल्कुल बदल रहा है और अधिकांश सीटों पर एनडीए महागठबंधन पर बढ़त बनाता जा रहा ये मैं नहीं कह रहा हूं जमीनी हकीकत यही है। जहां तक मिथिलांचल की बात है तो महागठबंधन का इस बार भी खाता खुलना मुश्किल दिखता है। चुनाव के पहले तक मतदाता एनडीए प्रत्याशी के विरोध में आग उगलता दिखता है लेकिन मतदान केंद्र तक पहुंचते पहुंचते इन मतदाताओं का दिल पिघलने लगता है और ये एनडीए प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करते हैं। इसे मोदी का करिश्मा नहीं तो और क्या कहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है सीमांचल मगध सारण और चम्पारण में परिणाम जो हो लेकिन मिथिलांचल में मोदी का किला आज भी मजबूत है। शिवहर उजियारपुर समस्तीपुर और बेगुसराय में कांटे का मुकाबला जरूर है लेकिन इन क्षेत्रों में भी मतदाताओं के दिलों में मोदी जरूर बास कर रहे हैं। जो जानकारी मिल रही है उसमें सात मई को सम्पन्न हुए चुनाव में मतदाताओं ने जो खेल किया तेरह मई को भी वही खेल दोहरा दिया है। हर चुनावी आंकलन मिथिलांचल में फेल होता दिख रहा है। एक दो सीटों को छोड़ दें बाक़ी सभी सीटों पर एनडीए का पलड़ा भारी है। इस बार के चुनाव में न कोई लहर है और न कोई हवा फिर भी मतदाताओं का मिजाज मिथिलांचल में मोदी की ओर हीं है।मिथिलांचल जो भाजपा का मजबूत किला माना जाता है उसे ढाह पाना महागठबंधन के लिए मुश्किल हीं नहीं नामुमकिन दिख रहा है। जीत हार का अन्तर इस बार बड़ा नहीं होने जा रहा है लेकिन मोदी का जलवा मिथिलांचल में आज भी कायम है। प्रत्याशियों के प्रति जो गुस्सा दिख रहा था वह गायब होता जा रहा है। जदयू जरूर हाशिए पर जाती दिख रही है लेकिन मिथिलांचल में भाजपा की जड़ें बहुत मजबूत है जिसे हिला पाना फिलहाल महागठबंधन के लिए असंभव दिख रहा है। कोई बड़ी बात नहीं कि फिर एक बार इस क्षेत्र से महागठबंधन को खाली हाथ लौटना पड़े मतदाता का मूड इसी ओर इशारा कर रहा है। होगा क्या यह तो चार जून को पता चलेगा लेकिन राजनीतिक पंडितो का अगर मानें तो भाजपा की चमक मिथिलांचल में आज भी कायम है।

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