मधुबनी,
इस खबर को जानकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में क्या क्या कारनामे होते हैं। कारनामे तो बहुत होते आ रहे हैं लेकिन आपको बता दूं कि दोहरे नामांकन के खेल में भी मधुबनी टाप पर है । मधुबनी में 19 हजार,208 छात्र छात्राएं ऐसे हैं जिसका नामांकन सरकारी और प्राइवेट दोनों स्कूलों में है। इसमें भी मधुबनी सभी अड़तीस जिलों में औवल है, जबकि जहानाबाद जिला सबसे निचले पायदान पर यहां 2 हजार नो सौ चौरानवे है जिसका नामांकन दोनों जगह है। मधुबनी में दोहरे नामांकन वाले छात्र छात्राएं प्रति वर्ष जिला शिक्षा विभाग को तीन करोड़ बावन लाख का चूना लगा रहे हैं। अगर राज्य भर की बात की जाय तो ऐसे बच्चों की संख्या तीन लाख बावन हजार छ सौ है। इससे शिक्षा विभाग को प्रति वर्ष सतर करोड़ बावन लाख का नुक़सान हो रहा है। सच्चाई ये है कि डीबीटी डायरेक्ट वेनीफिसियल ट्रान्सफर का लाभ लेने के लिए इन बच्चों का सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में नामांकन कराया गया है। अब ऐसे बच्चों का नाम निजी या सरकारी दोनों में से एक जगह ही रह पायेगा। अब सवाल उठता है कि दोहरे नामांकन का खुलासा कैसे हुआ तो शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव विडियो कांफ्रेंसिंग से ई शिक्षा कोष पर अपलोड आधार कार्ड की कुछ दिन पहले समीक्षा की तो इस गोरखधंधे दोहरे नामांकन का खुलासा हो गया। अपर मुख्य सचिव के आदेश पर मधुबनी के जिला शिक्षा पदाधिकारी इसकी जांच में जुट गए हैं। विभाग से निर्देश है कि इसे किसी भी हाल में शून्य पर लाया जाय नहीं तो शख्त कारवाई की जायेगी। ई शिक्षा कोष पोर्टल पर बिना आधार कार्ड के नामांकित बच्चों का डाटा अपलोड करने का विकल्प निजी स्कूलों को दिया गया था। इसके बाद निजी स्कूलों द्वारा बच्चों का डाटा अपलोड किया जाने लगा। जांच के बाद दोनों जगहों पर नामांकन कराने की बात सामने आई। अब प्रशासी पदाधिकारी द्वारा आदेश दिया गया है कि दोहरे नामांकन वाले जितने छात्र छात्राएं हैं उन्हें डायरेक्ट बेनिफिट के माध्यम से उपलब्ध कराये जाने वाले लाभ बंद रहेंगे। इस बड़े घपला की उच्च स्तरीय जांच कराने की बात तो कही जा रही है लेकिन शिक्षा विभाग में क्या खेल हो रहा है इसका यह घपला बानगी मात्र है। इस तरह एक नहीं सैकड़ों ऐसे कारनामे शिक्षा विभाग में वर्षों से होता आ रहा है। बिहार के हर जिले की यही स्थिति है जिसमें मधुबनी औवल पर है। अब देखना है कि इतने बड़े घपले पर अपर मुख्य सचिव क्या एक्सन लेते हैं। सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए इस दोहरे नामांकन से सरकार और शिक्षा विभाग को प्रति वर्ष सतर करोड़ से अधिक का नुक़सान हो रहा है इसकी भरपाई कौन करेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। के के पाठक भी इस गोरखधंधे को नहीं पकड़ सके। जिला शिक्षा पदाधिकारी को यथा शीघ्र जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग को सौंपना है । इंतजार करिए जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद सरकार कोई एक्शन लेती है या इसे ठंढे बस्ते में डाल देती है।

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