मधुबनी/जयनगर। नेपाल में जारी उग्र आंदोलन और नेपाल बंद का असर अब भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्रों में गहराई से दिखने लगा है। लगातार तीसरे दिन नेपाल के सिरहा, सप्तरी और धनुषा जिलों में उपद्रव की घटनाएं हुईं, सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचा है।
भारत-नेपाल सीमा सील होने से जयनगर-जनकपुर रेल सेवा बंद है। जयनगर स्टेशन पर ट्रेन खड़ी है और नेपाली स्टेशन वीरान पड़ा है। सभी रेलकर्मी स्टेशन छोड़कर चले गए हैं। बॉर्डर पर एसएसबी जवानों की भारी तैनाती की गई है।
बाजार में सन्नाटा, व्यापार प्रभावित
- जयनगर बाजार, जहाँ रोज़ नेपाल के लोगों की भीड़ रहती थी, अब खाली है।
- जयनगर चैम्बर ऑफ कॉमर्स के महासचिव अनिल बेरोलिया ने बताया कि हर माह करीब 500 करोड़ का व्यापार नेपाल पर निर्भर है।
- पिछले तीन दिनों से ग्राहक न आने से बाजारों में सन्नाटा है, व्यापारी नेपाल की करेंसी भी एक्सचेंज नहीं कर पा रहे हैं।
- ठेला लगाने वाले मनोज साह, वरुण साह और कैलाश साह का कहना है कि दो-तीन दिन से एक भी नेपाली ग्राहक नहीं आया।
डर का माहौल
नेपाल के सीमावर्ती गांवों में लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। वहां की जनता भयभीत है और दरवाजे तक खोलने से डर रही है।
प्रशासन की सख्ती
हालात को देखते हुए मधुबनी डीएम आनंद शर्मा, एसपी योगेंद्र प्रसाद और एसएसबी कमांडेंट ने सीमा पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की है।
राजनीतिक संकट
सूत्रों के अनुसार नेपाल में भ्रष्टाचार और शासकों की ऐयाशी के खिलाफ महीनों से आंदोलन की तैयारी चल रही थी। उपद्रवियों ने अरबों की सरकारी संपत्ति नष्ट कर दी है। कई मंत्री और बड़े नेता देश छोड़कर भाग गए हैं।
काठमांडू में नई सरकार गठन की तैयारी तेज हो गई है। चर्चा है कि राजशाही लौटने की संभावना भी बन सकती है।
निष्कर्ष: नेपाल बंद का सबसे ज्यादा असर फिलहाल भारत-नेपाल सीमा के भारतीय बाजारों पर पड़ा है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो जयनगर और आसपास के व्यापारियों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

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