हरियाणा में भाजपा जीती नहीं है बल्कि वहां कांग्रेस हारी है। मतलब कांग्रेस को हरियाणा में भाजपा नहीं कांग्रेस हीं कांग्रेस को हराने के लिए व्यूह रचना रची नतीजा हुआ कि कांग्रेस जीत कर भी हार गयी। इस व्यूह रचना को न कोई बड़े विश्लेषक पत्रकार समझ सके और न कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व। हरियाणा की हार कांग्रेस को बहुत दूर तलक खदेरेगी इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव जहां होने जा रहा है वहां तक दिखेगा। हरियाणा में कांग्रेस की गुटबाजी और पार्टी विरोधी चाल चल रहे कुछ नेताओं ने पार्टी को बड़ा नुक़सान पहुंचाया है। वर्षों बाद हर एक्जिट पोल एक मत दिखा था और बड़े बड़े चुनाव विश्लेषक भी कांग्रेस की प्रचंड जीत की भविष्यवाणी कर रहे थे। स्वयं भाजपा हरियाणा में हार मान ली थी । शुरुआती रुझान भी ऐसा ही दिखा फिर ऐसा क्या हुआ कि भाजपा हरियाणा में जीत की रिकार्ड बना ली और लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का दावा ठोक दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस परिणाम पर कांग्रेस को चिंतन करना चाहिए और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं को चाहे वो कितने बड़े क्यों न हो पार्टी से निकाल बाहर कर देना चाहिए। ऐसे लोग हर राज्य में कांग्रेस को दीमक की तरह अन्दर अन्दर चाट रहे हैं। यह केवल हरियाणा नहीं कमोवेश हर राज्य में ऐसे लोग अंगद की तरह पार्टी में पांव जमाए बैठे हैं। बिना कोई परवाह किए इन लोगों से कांग्रेस को मूक्त होना जरूरी है। राहुल गांधी पार्टी को मजबूत करने के लिए दिन रात मिहनत करते दिख रहे हैं और चंद मुठ्ठी भर तथाकथित कांग्रेसी पार्टी में रहकर अपने स्वार्थ के लिए पाटी को रसातल में ले जाने पर तुले हुए हैं। इसी का नतीजा है कि हरियाणा में कांग्रेस को यह दिन देखना पड़ा है। भाजपा हरियाणा में काफी कमजोर दिख रही थी और हर स्थानीय और केन्द्रीय नेता मान बैठे थे कि यहां दूर-दूर तक जीत की कोई संभावना नहीं है। हरियाणा चुनाव परिणाम नरेंद्र मोदी के लिए संजीवनी का काम किया है। मोदी संघ के बीच जो तकरार की ख़बर आ रही थी उस पर भी विराम लगने की संभावना बढ़ गई है। हरियाणा में ख़ुशी और मातम दोनों स्थिति देखा जा रहा है।

कांग्रेस को स्थानीय नेता के कलह मनमानी और आपसी खींचतान के कारण हीं मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पराजय का मुंह देखना पड़ा था। यही हाल हरियाणा में भी देखने को मिला। कांग्रेस को अभी भी सही निर्णय लेकर ऐसे नेताओं को चिन्हित कर निकाल बाहर करना होगा नहीं तो राहुल गांधी को ये लोग आगे बढ़ने नहीं देंगे। हर राज्य में ऐसे मठाधीश बैठे हुए हैं जो कांग्रेस को बदनाम और कमजोर करने पर लगे हुए हैं। जो भी हो हरियाणा की जीती हुई बाजी हार में कैसे बदल गया इससे सीख कांग्रेस को लेना होगा नहीं तो महाराष्ट्र झारखंड और बिहार में भी हाथ मलने के शिवा कुछ नहीं बचेगा। जम्मू-कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस की सरकार जरूर बनने जा रही है लेकिन वहां भी कांग्रेस का परफार्मेंस बहुत खराब रहा। कांग्रेस को हरियाणा चुनाव परिणाम बहुत बड़ा नुक़सान कर दिया है। महाराष्ट्र झारखंड और बिहार में गठबंधन का दबाव बढना तय है। हालांकि हरियाणा में मत प्रतिशत बारह प्रतिशत बढ़ा है लेकिन परिणाम भाजपा के पक्ष में गया जिस पर आत्म चिंतन जरूरी है।

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