जिला परिषद अध्यक्ष विंदु गुलाब यादव को बड़ी राहत, कोर्ट ने लगाया अविश्वास प्रस्ताव पर ब्रेक। मधुबनी जिला परिषद जो कई महिनों से राजनीतिक अखाड़ा बन गया है वहां समय-समय पर कुछ न कुछ नया खेल चलता रहता है। जिला परिषद अध्यक्ष विंदु गुलाब यादव के उपर कुछ माह पूर्व हीं विरोधी खेमे के सदस्यों द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लगाया गया था। इस अविश्वास प्रस्ताव पर बहस तो हुआ लेकिन सदस्यों ने जो आरोप लगाया है उसमें कहा गया कि मतदान नहीं हुआ। साथ हीं इन्होंने कहा है कि बैठक में कोरम भी पूरा हुआ और पदाधिकारी अध्यक्ष विंदु गुलाब यादव के पक्ष में फैसला सुना दिया। इसके विरोध में विरोधी खेमे के पार्षद कोर्ट चले गए और पंचायती राज विभाग बिहार सरकार को भी लिखित रूप में इससे अवगत कराया। कोर्ट का फैसला तो नहीं आया लेकिन विभाग इस संज्ञान लेते हुए फैसला दिया कि मधुबनी जिला परिषद अध्यक्ष विंदु गुलाब यादव पर लगे अविश्वास प्रस्ताव में जो प्रकिया अपनायी गई वो गलत था। अगर पार्षद चाहें तो अध्यक्ष विंदु गुलाब यादव के खिलाफ फिर से अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं। बिना देर किए विभाग के पत्र का हवाला देते हुए पिछले दिनों 31 पार्षदों फिर से अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लगा दिया और इस आदेश को अपनी बड़ी जीत मानने लगे। लेकिन विंदु गुलाब यादव पूर्व विधायक गुलाब यादव की पुत्री हैं वह चुप कहां बैठने वाली थी उन्होंने ने भी इस पर रोक लगाने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पिछला मामला कोर्ट में लम्बित है अभी फैसला आना बाकी है। इधर विंदु गुलाब यादव द्वारा जो स्टे लगाने का कोर्ट से अनुरोध किया गया था उस पर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है। मतलब अविश्वास प्रस्ताव पर तत्काल कोई बहस या मतदान नहीं होगा। फिलहाल अध्यक्ष विंदु गुलाब यादव को बड़ी राहत मिल गई है। आगे क्या होगा यह तो नहीं पता लेकिन इससे उन पार्षदों को जोर का छटका जरूर लगा है जो मंसूबा पाले रखें थे कि एक बार फिर उनकी झोली भरने वाली है। इतना ही नहीं कुछ छोटभैये नेता जो ऐसे समय अचानक मैदान में कुद पड़ते हैं और तिकरम बाजी कर मोटी रकम बटोर लेते हैं उनकी उम्मीद पर भी पानी फिर गया है। मधुबनी जिला परिषद उपाध्यक्ष भी इस लपेटे में हैं उनके खिलाफ भी कोर्ट में मामला लटका पड़ा है। जो भी हो जिला परिषद में काम कम और राजनीति अधिक होती रहती है अधिकांश पार्षद क्षेत्रिय विकास से अधिक अपना विकास करने के फिराक में लगे रहते हैं। अध्यक्ष विंदु गुलाब यादव का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव एक बार हीं लगाया जाता है दुसरी बार लगाना कहीं से सही है। ये नियम सिर्फ मधुबनी जिला परिषद नहीं पूरे बिहार के लिए एक जैसा है। वे बतातीं हैं कि कुछ पार्षदों का फर्जी दस्तखत भी कराने का मामला सामने आ रहा है। तीन साल गुजर गए मधुबनी जिला परिषद क्षेत्र में कोई खास विकास कार्य नहीं हो सका लेकिन कुर्सी से हटाने और कुर्सी बचाने को लेकर पार्षदों के बीच नूरा कुश्ती का खेल चलता आ रहा है। जिला परिषद सदस्य तीन साल में बिना मिहनत किए दो बार दो भागों में बंटकर मोटी रकम बटोर चुके हैं यह तीसरा मौका था जिस पर फिलहाल विराम लग गया है। अब देखना है कि इस फैसले के बाद अध्यक्ष के विरोधी खेमा क्या नया गूल खिलाते हैं। गूल जो भी खिलायें लेकिन फिलहाल अध्यक्ष विंदु गुलाब यादव को कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है और इनके खेमे में खुशी है।


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