मधुबनी।
बिस्फी विधानसभा क्षेत्र इन दिनों राजनीतिक हलचल का केंद्र बना हुआ है। भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल और राजद सांसद डॉ. फैयाज अहमद के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। दोनों नेताओं की पुरानी राजनीतिक अदावत अब नए सिरे से उभर रही है और इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव के समीकरणों पर पड़ता दिख रहा है।
रहिका चौपाल से शुरू हुआ विवाद
विवाद की जड़ रहिका में आयोजित एक चौपाल कार्यक्रम से जुड़ी है। महागठबंधन के नेताओं और स्थानीय लोगों ने विधायक बचौल से तीखे सवाल किए। विधायक के अनुसार, कार्यक्रम के दौरान उनके साथ बदसलूकी भी हुई। इसके बाद भाजपा विधायक और राजद नेता अरुण यादव के बीच एफआईआर दर्ज कराने तक की नौबत आ गई।
विवाद थमने के बजाय लगातार बढ़ता जा रहा है।
बचौल के आरोप
विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल ने सांसद डॉ. फैयाज अहमद और उनके पुत्र आसिफ अहमद पर निशाना साधा है।
- जमीन हड़पने और मधुबनी मेडिकल कॉलेज में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए।
- दावा किया कि रहिका चौपाल में जो कुछ हुआ, वह सब फैयाज और आसिफ की शह पर हुआ।
- बचौल ने फैयाज परिवार को “मिट्टी में मिला देने” जैसी कठोर भाषा में चुनौती दी।
महागठबंधन का पलटवार
महागठबंधन के नेताओं का कहना है कि रहिका की घटना में फैयाज अहमद या उनके पुत्र का कोई हाथ नहीं था। उनका नाम लेकर एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह गलत है।
राजद और कांग्रेस नेताओं ने बचौल के आरोपों को राजनीतिक साज़िश बताया और कहा कि भाजपा विधायक जनता को गुमराह कर रहे हैं।
पुरानी अदावत और नया समीकरण
- बिस्फी विधानसभा में बचौल और फैयाज अहमद की टक्कर कोई नई नहीं है।
- कई चुनावों से दोनों आमने-सामने रहे हैं और कई बार बचौल भारी पड़े हैं।
- इस बार डॉ. फैयाज खुद चुनाव न लड़कर अपने पुत्र आसिफ अहमद को राजद टिकट से मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
- कांग्रेस भी इस सीट पर दावेदारी कर रही है। इम्तियाज नुरानी मेहनत कर रहे हैं।
भाजपा की स्थिति
भाजपा की ओर से हरिभूषण ठाकुर बचौल का टिकट पक्का माना जा रहा है।
उनकी छवि फायर ब्रांड नेता की है और भाजपा उन्हें बिस्फी में मजबूत उम्मीदवार मानती है।
बदलते राजनीतिक समीकरण
- बिस्फी कभी कांग्रेस का गढ़ रहा है। डॉ. शकील अहमद ने वर्षों तक यहां दबदबा बनाए रखा।
- भाजपा के उभार के बाद समीकरण बदल गए और बचौल ने निर्दलीय चुनाव जीतकर इतिहास रचा।
- अब भाजपा और महागठबंधन दोनों के बीच करो या मरो की लड़ाई तय है।
फैक्टर जो चुनाव तय करेंगे
- हिंदू-मुस्लिम समीकरण इस बार भी बड़ा फैक्टर रहेगा।
- यदि राजद और कांग्रेस एकजुट होकर लड़े तो मुकाबला त्रिकोणीय न होकर सीधा हो सकता है।
- अगर महागठबंधन बिखरा रहा तो बचौल का पलड़ा भारी होगा।
प्रशासन की चुनौती
तेज होती बयानबाज़ी और बढ़ती तनातनी के बीच बिस्फी में शांतिपूर्ण चुनाव कराना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगा।
राजनीतिक शतरंज की बिसात बिछ चुकी है और अब देखना है कि इस शह-मात के खेल में बाज़ी किसके हाथ लगती है।


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