बेनीपट्टी विधानसभा जिले की चर्चित विधानसभाओं में से एक है। यहां से बड़े बड़े धुरंधर और जमीन से जुड़े नेता विधायक एमपी और मंत्री बने हैं। पहले कांग्रेस फिर वाम दलों का बेनीपट्टी गढ़ रहा है। दशकों तक इन्हीं दो दलों के बीच चुनावी रण होती थी कभी कांग्रेस तो कभी भाकपा यहां से जीतती आ रही थी । हालांकि यहां समाजवादी चिंतक भी हुए और दो से तीन बार यहां का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं। कालान्तर में वाम दलों की स्थिति कमजोर होती चली गई। कांग्रेस भी इस किला को मजबूत नहीं रख पायी। नतीजा हुआ कि इस बाह्मण बाहुल्य क्षेत्र में भाजपा का उदय हुआ और पहली बार 2010 में वर्तमान विधायक व पूर्व मंत्री विनोद नारायण झा यहां से विधायक बने। हांलांकि 2015 में उन्हें पूर्व मंत्री युगेशवर झा की पुत्री कांग्रेस प्रत्याशी भावना झा से डिफिट खाना पड़ा था । बेनीपट्टी भोगेंद्र झा बैद्यनाथ झा युगेशवर झा सरीखे अनेक बड़े नेताओं की जन्म भूमि और कर्म भूमि रही है और इस धरती की चर्चा देश से लेकर विदेशों तक होती रही है। कभी कांग्रेस का गढ़ रहा बेनीपट्टी विधानसभा में भाजपा की जड़ें काफी मजबूत होती चली गई। सिद्ध पीठ उचैठ और काली दास डीह को लेकर बेनीपट्टी विधानसभा की चर्चा हमेशा से होती आ रही है। विद्वानों राजनेताओं और एक से बढ़कर एक स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि बेनीपट्टी विधानसभा विकास के लिए आज भी तरस रहा है। अधवारा समूह की नदियों का कहर इस क्षेत्र को हर वर्ष झेलना पड़ता है। बाढ़ और सुखार का दंश साथ साथ झेलने वाला यह क्षेत्र हमेशा से विकास पुरुष का राह ढुंढ रहा है। बेनीपट्टी विधानसभा के 75 प्रतिशत लोग खेती पर आश्रित हैं। किसानों की माली हालत साधन के अभाव और बाढ़ सुखार के कारण दयनीय बनी रहती है। रोजगार के तलाश में यहां से 80 प्रतिशत युवा और खेतीहर मजदूर महानगर की ओर पलायन कर चुके हैं। शिक्षा स्वास्थ्य की लचर व्यवस्था से आम सर्वहारा वर्ग बेबसी की जिन्दगी जीने को विवस हैं। मुख्य सड़क तो ठीक है लेकिन ग्रामीण सड़कों की स्थिति अच्छी नहीं है। एक अंगिभूत महाविद्यालय को छोड़ इतने बड़े विधानसभा में और कोई दूसरा अगिभूत महाविद्यालय नहीं रहने से छात्राओं को शिक्षा के लिए भटकना पड़ता है । बेनीपट्टी बाजार में जाम और जल जमाव की समस्या लोगों का जीना हराम कर दिया है। एक से एक बड़े राज नेता इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति देख आपका रूह कांपने लगेगा। परिसीमन के बाद इस विधानसभा का भूगोल भी बदल गया है। जातीय समीकरण की बात करें तो जिले के सभी दस विधानसभा में बेनीपट्टी विधानसभा इकलौता ऐसा विधानसभा है जहां सबसे अधिक ब्राह्मणों की आवादी है। एक दो बार को छोड़ दें तो यहां हमेशा से इसी वर्ग के विधायक होते आ रहे हैं। अति पिछड़ा यादव मुसलमान और दलित समाज की भी अच्छी आवादी है। गरीबी बेरोज़गारी शिक्षा स्वास्थ्य पेयजल सिंचाई की समस्या यहां सुरसा की तरह मुंह बाए खड़ी है। बेनीपट्टी अनुमंडल, प्रखंड, नगर पंचायत कार्यालय का आलम यह है कि यहां खुलेआम पदाधिकारी और कर्मचारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। पुलिस पदाधिकारी और थाना भी इससे अछूता नहीं है। पदाधिकारी और कर्मचारियों में कोई भय नहीं है। नतीजा है कि बिना रिश्वत दिए कोई काम होना मुश्किल है। अनुमंडल अस्पताल तो है लेकिन यहां किसी गंभीर बीमारी का इलाज नहीं होता। कुल आबादी के पांच प्रतिशत लोग तो मजे से जी रहे हैं लेकिन पचानवे प्रतिशत लोग नारकीय जीवन जी रहे हैं। जहां तक विधायक विनोद नारायण झा की बात है तो ये काफी मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति हैं और क्षेत्र में थोड़ा बहुत काम भी किए हैं इतना हीं नहीं सदन में क्षेत्र की समस्याओं को लेकर आवाज भी उठाते रहे हैं। लेकिन दस वर्षों में इन्होंने कोई बड़ा ऐसा काम नहीं किया जिसे यहां के लोग याद रख सकें। रोजी रोजगार यहां सबसे बड़ी समस्या है। न तो बेनीपट्टी में कोई कल कारखाना है न कोई तकनीकी शिक्षा केंद्र बन सका है। राजनीतिक रूप से जागरूक बेनीपट्टी विधानसभा के आम सर्वहारा वर्ग अपने विधायक विनोद नारायण झा से काफी नाराज़ दिख रहे हैं। यहां के लोग भी राजद भाजपा जदयू और कांग्रेस से उब चुके हैं। बेनीपट्टी विधानसभा में भी लोग नये विकल्प खोज रहे हैं। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा विधायक विनोद नारायण झा की नैया आगामी विधानसभा में डगमगा सकती है। होगा क्या यह समय बताएगा लेकिन बेनीपट्टी विधानसभा भी विकास से कोसों दूर है जिसका खामियाजा विधायक विनोद नारायण झा को आने वाले चुनाव में भुगतना पड़ सकता है।

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