बिहार,
नवादा जिले के दिदौर पंचायत के कृष्णानगर के लोगों के लिए बीती रात भयवाह तो रही.ही यह रात यहां के रहने वाले मुसहर समुदाय के लोगों के लिए काली रात साबित हुई। शाम 6 बजे 150 की संख्या में आए उग्रवादियों ने पहले गोलियों की तड़तड़ाहट से माहौल खराब किया उसके बाद बम के धमाके और केरोसिन तेल से पूरी बस्ती को आग के हवाले कर दिया। आग की लपटे देखते देखते पूरी बस्ती में पसर गई । सैकड़ों घर तबाह हो गए । मवेशियों की तड़प तड़प कर मौत होती चली गई।
*क्या है घटना के पीछे की कहानी*
स्थानीय लोग जिनके घर तबाह हुए हैं वे बताते हैं कि इस स्थान पर हमारे पूर्वज रहा करते थे.हम पीढ़ी दर पीढ़ी यहीं रहते हैं.लेकिन बीते कुछ समय से पासवान समुदाय के लोग इस जगह पर अपना कब्जा जमाना चाहते हैं। जबकि यह जमीन हमें बिहार सरकार के द्वारा मिली हुई है। पूर्व में भी विवाद हो चुका है.स्थानीय प्रशासन को इस विषय की जानकारी कई बार दी जा चुकी है,लेकिन इसपर कोई अमल नहीं हुआ। जहां आग लगाई गई यह पूरी बस्ती महा दलित समुदाय की है ।जो 5 एकड़ में फैला हुआ है। यहां तकरीबन 100 से अधिक घर हैं,जिनमें आधे घर की दीवारें,मिट्टी,जाले और चूल्हा चौकी नष्ट हो चुकी है.
*कल था बच्चे का छठीहार,आज मातम*
.कारी देवी पहली बार मां बनी है.
आने वाले कल वो अपने बच्चे का धूमधाम से छठीहार मनाने वाली थी.उसने कुछ पैसे कर्ज पर भी लिया था.लेकिन इस त्रासदी ने पूरे घर को तबाह कर दिया।.अब यहां मौजूद सारे लोग बेबस और बेसुध दिखाई दे रहे हैं.कारी देवी ने बताया कि बच्चे बचेंगे तो सब हासिल हो जाएगा,चिंता जरूर है.लेकिन जान बची है तो सब फिर से हासिल कर लेंगे.
*प्रीति बताती है उसने क्या देखा*
यहीं थोड़ी दूर पर हमें प्रीति दिखाई दी.प्रीति की उम्र 10 साल है और वो सरकारी विद्यालय में कक्षा 4 की छात्रा है.उसने हमें बताया कि शाम ढलते ही सब अपने अपने घर लौट रहे थे.महिलाएं खाना बना रही थी.तभी पैदल लगभग 150 की संख्या में लोग आए और उन्होंने गाली गलौज करना शुरू कर दिया.फिर बंदूक से फायरिंग की.इससे भी उनका मन नही भरा तो उन्होंने बस्ती की और बम फेंक दिया.कई लोग केरोसिन उझल रहे थे.फिर बस्ती में अफरातफरी मच गई,सब अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे.जिन्होंने आग लगाई वो भी भाग गए।
स्थानीय लोग बताते हैं,घटना के लगभग 1 घंटे के बाद पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची. फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग पर कंट्रोल करने की पूरी कोशिश की.वो जबसे आए तत्पर रहे.यही कारण है कि यहां के आधे घर सुरक्षित बच गए.
वरना तबाही और भयानक मचती.
बस्ती में तबाही का है आलम
आलम यह है कि यहां बड़े बुजुर्ग से लेकर छोटे बच्चों तक को
खाना नसीब नहीं हुआ है.बीते रात से ही ये लोग भूख से बिलबिला रहे हैं.स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा चुरा गुड़ जरूर बांटा जा रहा है लेकिन उससे पेट नहीं भरा जा सकता.एक तरफ जहां इनकी किस्मत अच्छी रही कि इस कुकृत्य में इनकी जान बच गई वहीं किस्मत का दोष दें या अपराधियों के रक्त चरित्र की होली खेलने का दोष.इनके आशियाना तबाह हो चुके हैं.प्रशासन हाथ पैर भांज रहा है लेकिन बड़ा सवाल है कि दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी। क्या फिर से इन महादलितों का आशियाना बना पायेगा। बिहार में सर्वत्र अराजकता का माहौल है हत्या लूट डकैती अपहरण आगजनी से लोग भयभीत हैं। लगता हीं नहीं कि बिहार में शासन प्रशासन है।

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