दरभंगा/मधुबनी, 4 सितंबर 2025। मिथिलांचल में विशेष आस्था के साथ मनाई जाने वाली इंद्र पूजा आज से शुरू हो गई। यह अनुष्ठान गुरुवार, 4 सितंबर से बुधवार, 10 सितंबर तक चलेगा और अंतिम दिन विसर्जन व सामूहिक प्रार्थनाएँ होंगी।
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस पूजा का उद्देश्य भगवान इंद्र को प्रसन्न कर अच्छी वर्षा और अकाल-निवारण की कामना करना है। इंद्र के साथ सूर्य, पंच देवता और नवग्रह की उपासना का भी विधान है।
क्यों खास है इंद्र पूजा?
- जल/वृष्टि के देवता इंद्र की आराधना के माध्यम से वर्षा, समृद्धि और फसलों की भरपूर उपज की कामना की जाती है।
- मिथिलांचल, खासकर दरभंगा और मधुबनी के शहरी व ग्रामीण मोहल्लों में सामूहिक रूप से मंडप, इंद्र-ध्वज और झांकी सजती हैं।
- परंपरा के मुताबिक यह पर्व सामुदायिक भागीदारी और साझी विरासत का प्रतीक माना जाता है।
तिथि-सार
- प्रारंभ: गुरुवार, 4 सितंबर 2025
- समापन/विसर्जन: बुधवार, 10 सितंबर 2025
- स्थान: दरभंगा, मधुबनी सहित मिथिलांचल के गली–मोहल्ले एवं पूजा-पंडाल
सांकेतिक कार्यक्रम (स्थानीय समितियों के अनुसार समय बदल सकता है)
- दिन 1 (4 सित.): कलश-स्थापना, इंद्र-ध्वज रोहण, संकल्प।
- दिन 2–6: नवग्रह व पंच-देव आराधना, वेद-मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, अन्न/जल दान।
- दिन 7 (10 सित.): पूजन-समापन, सामूहिक आरती, विसर्जन व वर्षा-प्रार्थना।
पूजा-विधि (संक्षेप)
- शुद्धिकरण व संकल्प – मंडप/मंदिर की शुद्धि, कलश-स्थापना, इंद्र-यंत्र/प्रतीक की प्रतिष्ठा।
- आवाहन–अर्चन – पुष्प, अक्षत, दुर्वा/पत्ते, गंध, नैवेद्य, दीप-धूप से इंद्र सहित सूर्य, पंच देवता और नवग्रह की पूजा।
- जप/स्तोत्र – इंद्र सूक्त/वेद मंत्रों का उच्चारण, सामूहिक प्रार्थना।
- आरती व प्रसाद – सायंकालीन आरती, जल/अन्न का वितरण, वर्षा व समृद्धि की कामना।
आचार–संहिता व अपील
- पर्यावरण-अनुकूल सजावट, ध्वनि-सीमा का पालन, साफ-सफाई पर जोर।
- पीने के पानी, प्राथमिक चिकित्सा और आपात सेवाएँ बाधित न हों—इसकी व्यवस्था समितियाँ करें।
- यातायात व भीड़-नियंत्रण के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुरक्षित मार्ग।
विशेषज्ञ की राय
4–10 सितंबर का पूरा कालखंड इंद्र-आराधना के लिए शुभ माना गया है। वे कहते हैं कि धार्मिक अनुशासन और सामूहिक प्रार्थना के साथ समृद्धि, वर्षा और धन-वृद्धि के फल की कामना की जाती है।


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