बिस्फी विधायक बचौल ने दर्ज कराई FIR
रहिका/मधुबनी, 30 अगस्त 2025। रहिका प्रखंड में एक दैनिक अख़बार की ओर से आयोजित चौपाल के दौरान हुए विवाद ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। बिस्फी के विधायक बचौल ने इस प्रकरण में स्थानीय कुछ लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज कराई है। FIR में आरोप है कि चौपाल स्पॉन्सर्ड था और साज़िश के तहत उन्हें बुलाया गया, जहाँ उनके साथ बदसलूकी हुई एवं जान से मारने की कोशिश भी की गई।
घटना क्या है
दैनिक अख़बार की चौपाल के दौरान तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद माहौल गरमा गया।
विधायक बचौल का आरोप है कि पूरी रूपरेखा पहले से रची गई थी और कार्यक्रम को बहाना बनाकर उन्हें निशाना बनाया गया।
विवाद के बाद पुलिस हस्तक्षेप हुआ और मामले में FIR दर्ज की गई। जांच जारी है।
विडिओ के माध्यम से देखें क्या हुआ था !
दूसरे पक्ष की प्रतिक्रियाएँ (सार)
विवाद पर अलग-अलग दलों के नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई और निष्पक्ष जाँच की मांग की:
अखिल भारतीय मिथिला पार्टी के मनोज झा ने कहा कि सार्वजनिक मंच पर अराजकता अस्वीकार्य है; प्रशासन को तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए और कार्यक्रम आयोजकों की भूमिका भी स्पष्ट होनी चाहिए।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रो. सीतलाम्बर झा ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर आँच बताते हुए कहा कि असहमति को संवाद से सुलझाया जाना चाहिए, न कि टकराव से।
सीपीआई नेता मिथिलेश झा ने घटना की स्वतंत्र जांच, वीडियो/सीसीटीवी फुटेज के संरक्षण और दोषियों की पहचान की मांग रखी।
कांग्रेस (रहिका प्रखंड) के युवा अध्यक्ष रंजन झा ने कहा कि युवाओं की भागीदारी शांति और शिष्टाचार के साथ होनी चाहिए; उकसावे और हिंसा की जगह नहीं है।
राजद के मो. समीर ने प्रशासन से त्वरित तथ्यान्वेषण और सभी पक्षों को सुरक्षा प्रदान करने की अपील की, ताकि राजनीति में डर और अविश्वास का माहौल न बने।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने FIR के आधार पर केस दर्ज कर लिया है और संबंधित धाराओं में जाँच आगे बढ़ रही है।
प्रारंभिक तौर पर कार्यक्रम में मौजूद व्यक्तियों की पहचान, मोबाइल/कैमरा फुटेज, स्थल पर मौजूद गवाहों के बयान और मेडिकल/मैमोरेंडम जैसी औपचारिकताएँ की जा रही हैं।
आयोजन पक्ष का रुख
अख़बार प्रबंधन/आयोजक समिति की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतज़ार है। स्पष्ट पक्ष आने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।
पृष्ठभूमि
“चौपाल” कार्यक्रम आमतौर पर जनसमस्याओं पर सीधा संवाद का मंच होता है। बीते कुछ समय से ऐसे मंचों पर राजनीतिक बहस तेज़ होने के कारण टकराव की घटनाएँ भी सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निष्पक्ष संचालक, सुरक्षा प्रोटोकॉल और पूर्वनिर्धारित आचारसंहिता से ऐसे विवाद टाले जा सकते हैं।
आगे क्या
जाँच एजेंसियाँ वीडियो/ऑडियो साक्ष्यों की पड़ताल करेंगी।
दोनों पक्षों के विस्तृत बयान लिए जाएंगे; आवश्यकता होने पर और धाराएँ जोड़ी/हटाई जा सकती हैं।
शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए जाने की संभावना है।
निष्कर्ष
रहिका की चौपाल से उठा विवाद अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। एक ओर विधायक द्वारा कराई गई FIR है, तो दूसरी ओर विपक्षी दलों का दबाव है कि पारदर्शी और निष्पक्ष जाँच हो। अब नज़र इस बात पर है कि पुलिस की तफ्तीश क्या निष्कर्ष निकालती है और आयोजकों का आधिकारिक पक्ष कब सामने आता है।

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