मधुबनी में एक मनोज झा नहीं बल्कि इस तरह के और कई मनोज झा हैं जो पर्दे के पीछे छीपे हुए हैं। दिल्ली मुंबई कोलकाता आदि जगहों से ये हेराफेरी कर गांव से लेकर जिला भर में पैसों के बल पर सुर्खियां बटोर रहे हैं। ये महानुभाव क्या करते हैं किसी को नहीं पता लेकिन यहां आकर तास की पतों की तरह पैसा बांटते फिरते हैं। न शिक्षा न नौकरी और न कोई बड़ा व्यापार फिर ये लोग कहां से इतना पैसा लाकर बांटते फिरते हैं।

यह एक बड़ा सवाल है। एक मनोज झा जो अपने को तथाकथित समाजसेवी कहता था और पैसों के बल पर वर्षों से दिखावा कर रहा था। इतना हीं नहीं पैसों के बल पर हर किसी को ये मदारी की तरह अलग-अलग जगहों पर जाकर डिस्को डांस दिखाकर खोखला साहनुभूति बटोरना चाहता था।उस मनोज झा की असलियत तो सामने आ गया लेकिन इस तरह के और मनोज झा जो हर सप्ताह दिल्ली से आकर गांव में मजमा लगाता है और साबित करना चाहता है कि मैं हीं अब जिला का शहंशाह हूं। गांव गांव जाकर पैसा बांटना, लोगों को झुट बोलकर गुमराह करना ,भोले भाले लोगों के बीच पहुंचकर डींग हांकना गांव में देखते हीं देखते महल खड़ा कर लेना। एक साधारण व्यक्ति से असाधारण व्यक्ति बनने का सपना पाल लेना इन्हें चर्चा में ला दिया है। पुलिस के साथ कई एजेंसियों के रडार पर ये जनाब चढ़ चुके हैं। एजेंसी की जाल बीच चुकी है जल्द हीं जिले के दुसरे मनोज झा इस जाल में फंसने वाले हैं। ऐसे नटवर लाल जो गलत तरीके से पैसा ऐंठ कर दिखावा करने में लगे हैं इस नटवरलाल की कहानी भी जल्द सामने आने वाली है। शिक्षा के नाम पर शून्य ऐसे ठगी करने वाले लोग इतनी बड़ी बड़ी बातें करते हैं कि इनके सामने बड़े बड़े शिक्षा विद और आला अधिकारी भी फेल दिखते हैं । पैसों के बदौलत ये राजनेता बनने का सपना पाल रखे हैं जो कभी पूरा नहीं होने वाला है। पुलिस की निगाह ऐसे लोगों पर है जो महानगर में ठगी कर या कोई जालसाजी कर गांव में आकर धाक जमाना चाहते है उनका भी बुड़ा दिन आने हीं वाला है। मधुबनी जिला बौद्धिक रूप से देश के अग्रणी जिलों में से एक है। यहां की संस्कृति और इतिहास गौरवशाली रहा है। एक से बढ़कर एक विद्वान इस माटी में जन्म लेकर पढ़े बढ़े हैं और देश विदेशो में कृतिमान स्थापित कर चुके हैं और आज भी कर रहे हैं। उस धरा पर इस तरह के लोग यहां की मिट्टी को कलंकित करने में लगे हैं। मनोज झा पिछले 20 वर्षों से ठगी करता आ रहा है हर कोई जानता है कि ये बहुत बड़ा नटवर लाल है लेकिन किसी ने कभी इनके खिलाफ मुंह नहीं खोलने का हिम्मत किया। मन बढ़ता चला गया और जो कोई नहीं कर सकता वो करके दिखा दिया है । चले थे समाज सेवा करने इसके आर में क्या गुल खिलाते थे यह अब हर कोई जान गया है। एक कहावत है कि जब पाप का घरा भर जाता है तो वह टुटता नहीं विस्फोट करता है। इस विस्फोटक से इतना दुर्गंध निकलता है कि गांव समाज जिला और प्रदेश तक गंध से दुषित हो जाता है। कमोवेश यही हाल इन नटवर लालों ने मधुबनी का कर दिया है। आरक्षी अधीक्षक इस तरह के जितने नटवर लाल जिले में हैं उसे चिन्हित कर कड़ी से कड़ी सजा दिलायेंगे ऐसा लोगों का कहना है। देखिए कितने दिनों में जिले का दुसरा नटवरलाल पुलिस के हत्थे चढ़ता है। बस बहुत नहीं थोड़ा इंतजार कर लीजिए सब कुछ सामने दिख जायेगा।

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