फुलपरास,
फुलपरास विधानसभा के मतदाताओं के मन में इस बार क्या चल रहा है पता है आपको नहीं न आइए हम बताते हैं। फुलपरास समाजवादियों का गढ़ है तो मधेपुर दिग्गज कांग्रेस नेता रहे स्वर्गीय राधानंद झा की कर्म भूमि। घोघरडीहा प्रखंड में भोला झा जैसे बड़े कद्दावर चेहरा यहां की राजनीति को वर्षों तक दशा दिशा दिखाते रहे। आज ये तीनों प्रखंड मिलकर फुलपरास विधानसभा कहलाता है। तीनों प्रखंड की राजनीति बिल्कुल बदल गई है और नयी राजनीति का यहां उदय हो चुका है। वर्तमान में बिहार सरकार में परिवहन मंत्री शीला मंडल यहां की विधायक हैं। शीला मंडल की राजनीतिक पृष्ठभूमि में यही है कि ये हरियाणा के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय धनिक लाल मंडल के भाई की पुत्र वधू हैं। इससे पहले ये कभी राजनीति की स्वाद नहीं चखी थी। 2020 में इन्हें अचानक गुलजार देवी जो निवर्तमान विधायक थी का टिकट काट कर जदयू फुलपरास से प्रत्याशी बना दिया और ये कांग्रेस के बड़े नेता पाठक जी को हराकर विधानसभा पहुंच गयी। यहां भी जातीय गोलबंदी इन्हें जीत का सेहरा पहना दिया। लोगों को ताज्जुब तो तब हुआ जब हाउस वाइफ से विधायक बनी शीला मंडल को नीतीश मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री भी बना दिया गया। तकरीबन साढ़े चार वर्ष से शीला मंडल मंत्री हैं। अब बात करते हैं फुलपरास विधानसभा में विकास की तो क्षेत्र के लोग बताते हैं कि जब शीला मंडल विधायक से मंत्री बनी थी तो यहां के लोग खुशी से फूले नहीं समा रहे थे। लेकिन साढ़े चार साल गुजर गए मंत्री अपने क्षेत्र में कोई भी ऐसा काम नहीं की जिसे यहां के मतदाता याद रख सके। तीनों प्रखंड के लोगों को सिर्फ निराशा हाथ लगी। खासकर कोशी के सात पंचायतों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। आज भी यहां के लोग बाढ़ के समय उपर वाले के भरोसे जीने को विवस हैं। कमोवेश यही हाल मधेपुर प्रखंड की है जहां जाम और जल जमाव बड़ी चुनौती बनी हुई है। सम्पूर्ण विधानसभा में रोजी रोजगार सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। इस क्षेत्र के लाखों लोग पलायन कर चुके हैं। किसान और खेतीहर मजदूरों के सामने सबसे अधिक परेशानी है। शिक्षा स्वास्थ्य की स्थिति तो खराब है हीं ग्रामीण सड़कें भी टुट कर बिखर रही है। मंत्री जी चुनाव के समय जो वायदे की थी उसका अनुपालन नहीं होने से मतदाताओं में बहुत निराशा और गुस्सा देखा जा रहा है। फुलपरास विधानसभा में जहां तक जातीय समीकरण करण की बात है तो यहां सबसे अधिक अति पिछड़ा समाज के मतदाता हैं। लेकिन बाह्मण यादव मुसलमान और दलित समाज के लोगों की संख्या भी अच्छी खासी है।

यह भी तय है कि आगामी विधानसभा चुनाव में फिर यहां से मंत्री शीला मंडल हीं जदयू से चुनाव मैदान में रहेंगी इसके एक नहीं अनेक कारण हैं। नीतीश कुमार के करीबी मंत्रियों में एक शीला मंडल को आगामी विधानसभा चुनाव बहुत आसान नहीं मुश्किल भड़ा होने वाला है। राजद कांग्रेस गठबंधन भी यहां बहुत कमजोर नहीं है। इसके साथ प्रशांत किशोर का जन सुराज फुलपरास विधानसभा में भी तेजी से पांव फ़ैला लिया है। इस बार यहां आमने-सामने नहीं त्रिकोणीय मुकाबला होना तय माना जा रहा है। मंत्री शीला मंडल के करीबी रहे बहुत सारे लोग कई कारणों से दूर होते चले गए हैं जो पिछले चुनाव में किंग मेकर की भूमिका में थे। इसका भी खामियाजा इन्हें विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। जिले का सर्वाधिक पिछड़े विधानसभा सभाओं में एक फुलपरास विधानसभा की राजनीति इस बार करबट बदलना चाहती है। अगर ऐसा हुआ तो मंत्री जी का राह आगामी विधानसभा चुनाव में आसान नहीं होने वाला है। गठबंधन के साथी भाजपा भी यहां कोई नया गूल खिला सकती है कारण स्पष्ट है कि दोनों दलों में तालमेल का घोर अभाव है। जो भी होगा यह तो समय के। गर्भ में है लेकिन मंत्री शीला मंडल के सामने चहुं तरफा चुनौती दिख रहा है। हालांकि जदयू इन्हें फिर से जीत दिलाने के लिए फुलपरास में हर खेल खेल सकती है। थोड़ा इंतजार करिए फुलपरास में भी बहुत कुछ नया होने वाला है।

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