आखिर लौकहा विधायक भरत मंडल से क्षेत्र के लोग क्यों हैं इतने नाराज़। क्या है इसका वजह आप जानते हैं नहीं न आइए हम बताते हैं। लौकहा विधानसभा में बड़ी उम्मीद के साथ यहां के लोग राजद विधायक भरत मंडल को पिछले चुनाव में सर आंखों पर बिठाया था। यह सीट जदयू का पारम्परिक सीट बन चुका था और यहां से लगातार जदयू प्रत्याशी जीतते आ रहे थे। पिछले चुनाव में तत्कालीन विधायक लक्ष्मेश्वर राय से लोगों की नाराजगी देखने लायक थी। इसके एक नहीं अनेक कारण थे। इतनी नाराजगी के बाबजूद जदयू प्रत्याशी लक्ष्मेश्वर राय सम्मान जनक वोट लाने में सफल रहे थे। भरत मंडल चुनाव तो कई बार लड़े लेकिन विधायक पहली बार लौकहा के मतदाताओं ने हीं बनाया। स्थानीय लोग बताते हैं कि जीतने के बाद मंडल जी का स्वभाव बिल्कुल बदल गया और क्षेत्र के लोगों से उनका बर्ताव भी संतोष जनक नहीं रहा। ये हम नहीं लौकहा विधानसभा के मतदाताओं का कहना है। जहां तक विकास की बात है तो इन्होंने कोई भी ऐसा काम इस पिछड़े विधानसभा क्षेत्र में नहीं करवा पाए जिसे यहां के मतदाता याद रख सके। लोग कहते हैं कि कुछ गिने-चुने लोग विधायक से जरूर लाभान्वित हो रहे हैं। लेकिन आम लोग इनसे कटते चले गए। लौकहा विधानसभा के हर पंचायत में अराजकता की स्थिति कायम है। पदाधिकारी कर्मचारियों का क्या कहना ये मस्ती में उगाही कर रहे हैं। पुलिस पदाधिकारी के लिए तो यह क्षेत्र ऐशगाह और सबसे बड़ा चारागाह बन चुका है। अपराध रोकने में विफल पुलिस प्रशासन से लोगों की नाराजगी सातवें आसमान पर जा पहुंचा है । ये हालात सिर्फ लौकहा में नहीं बल्कि तीनों थाना की है। एक समय था कि कोई भी पदाधिकारी और कर्मचारी इस क्षेत्र में का अपना योगदान नहीं देना चाहते थे पुलिस की भी यही हाल थी। लेकिन आज इस क्षेत्र में हर कोई आना चाहते हैं। मतलब साफ है कि यहां सरकारी योजनाओं को लुटने की खुली छूट मिली हुई है। गांव गांव में पेयजल का संकट है। सड़कें टुट गई है हर जगह जल जमाव की समस्या है से लोग परेशान हैं। स्कूली शिक्षा दम तोड रहा है। सरकारी स्वास्थ्य सुविधा इस क्षेत्र में नहीं के बराबर है अगर है भी तो किसी काम का नहीं। गरीबी इतनी कि लोगों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति यहां वर्षों से बनी हुई है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति जस की तस है।रोजगार के लिए लोग गांव छोड़ महानगर पलायन कर गए हैं। किसानों मजदूरों महिलाओं में भारी निराशा व्याप्त है। लौकहा विधानसभा में एक भी अगीभूत महाविद्यालय नहीं होने के कारण छात्र छात्राओं को इधर उधर भटकना पड़ता है। बाढ़ और सुखार यहां की नियति बन गई है। लौकहा विधानसभा के साथ विडम्बना है कि दशकों से यहां बाहरी लोग हीं विधायक बनते आ रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। कुल मिलाकर लौकहा विधानसभा आज भी सूबे का सर्वाधिक पिछड़े विधानसभाओं में एक है। जहां तक विधायक भरत मंडल की बात है तो इन्होंने एक बार भी अपने क्षेत्र की समस्याओं को जोरदार तरीके सदन में नहीं उठाया। इस बात की नाराजगी तो है हीं इससे भी ज्यादा लोग बता रहे हैं कि किसी कार्यालय पदाधिकारी पर विधायक का न अंकुश है और न कोई चिंता। नतीजा है कि यहां प्रखंड अंचल थाना पंचायत में लूट मची हुई है। हां एक बात जरूर है कि क्षेत्र के लोग इन पर किसी तरह की हेराफेरी या वसूली का आरोप नहीं लगा रहे हैं ये बड़ी बात है। आगामी विधानसभा चुनाव में अगर ये फिर यहां से प्रत्याशी हुए तो इनका चुनाव बहुत मुश्किल भड़ा हो सकता है। कमोवेश यही हाल यहां जदयू की भी है। चर्चा है कि यहां दोनों गठबंधन प्रत्याशी बदलने की मूड में है। इस बार प्रशांत किशोर का जन सुराज भी इस विधानसभा में पूरी तरह पांव फ़ैला रहा है।आम लोग यहां बदलाव चाह रहे हैं। इस बदलाव के बयार में इस बार लौकहा विधानसभा में कोई करिश्मा हो जाय तो चौंकिएगा मत। होगा क्या यह तो समय बताएगा लेकिन वर्तमान राजद विधायक भरत मंडल से क्षेत्र में लोग बेहद खफा दिख रहे हैं। राजद वैसे भी जिला में एनडीए से बहुत कमजोर है । इस बार लौकहा राजद की लुटिया डूब जाय तो कोई आश्चर्य नहीं। दोनों प्रखंड लौकही और खुटौना की स्थिति एक जैसी है। चुनाव आते-आते यहां त्रिकोणीय मुकाबला होना तय माना जा रहा है। सरकार सिस्टम सांसद और विधायक आम जनता के निशाने पर है। फिलहाल इससे सामना विधायक भरत मंडल को हीं करना होगा। देखना होगा कि इसका सामना विधायक भरत मंडल कैसे करते हैं।


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