मधुबनी(बिहार)
मधुबनी जिला के जयनगर अनुमण्डल अंतर्गत लदनियां प्रखण्ड के एकहरी पंचायत के परसाही निवासी गणितज्ञ-सह-चर्चित युवा कवि युगल किशोर सिंह की कविता एक ऐसे काव्य संकलन में प्रकाशित हुई है जो अब ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट अमेजॉन के बेस्टसेलर में शामिल है।
मूलरूप से गणित के क्षेत्र में महारत हासिल कर रहे युगल किशोर सिंह परसाही गाँव के निवासी हैं और बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के रहे हैं। बचपन से साहित्य पाठन और साहित्य रचना में इनकी विशेष रुचि रही है और वह अब फलित भी हो रहा है। अभी तक शौकिया तौर पर काव्य पाठ/काव्य रचना करने वाले युगल किशोर सिंह साहित्यिक गलियारों में भी चर्चा का केंद्र बनते हैं।

“हर आईना झूठा है” काव्यम श्रृंखला की दूसरी पुस्तक है जो कि कविताओं एवं गजलों का एक अनूठा संग्रह है इसमें युगल किशोर सिंह की भी कुछ रचनाएँ शामिल हैं। यह पुस्तक वर्ष 2020 में कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन में प्रकाशित हुई थी और यह हम सभी जानते हैं कि लॉकडाउन के दौरान साहित्यिक-धार्मिक पुस्तकों का पठन-पाठन बढ़ गया था और उस अवधि में इस पुस्तक की माँग भी बढ़ गई थी। विशेषकर युवा वय के लोगों में इसके लिए आकर्षण अधिक रहा और कॉलेज/यूनिवर्सिटी की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी मोटिवेशन के तौर पर भी लाभान्वित हुए।
काव्य संग्रह के सम्पादक सूरज सिंह चौहान हैं जो मूल रूप से मोतिहारी(पूर्वी चंपारण) के रहने वाले हैं और पटना से शिक्षा-दीक्षा ग्रहण किये हैं। विशेष बात यह है कि सूरज सिंह चौहान स्वयं भी गणित में ही उच्च शिक्षा प्राप्त किये हैं और युवा कवि के रूप में चर्चित हैं तथा दैनिक भास्कर ग्रुप द्वारा शब्द भास्कर सम्मान, आईकैन फाउंडेशन द्वारा एक्सीलेंस अवॉर्ड 2020 से सम्मानित हैं। यह रचना “हर आईना झूठा है” काव्यम प्रकाशन से प्रकाशित हुई है जिसके मालिक और सीईओ सूरज सिंह चौहान ही हैं। श्री सूरज की कई पुस्तकें प्रकाशित हुई है- अल्फाज, कुछ टूटे ख्वाब, हर आईना झूठा है और शिकायतें इत्यादि।

कौन हैं युगल किशोर सिंह-
युगल किशोर सिंह लदनियां के परसाही गाँव निवासी हैं तथा उनकी प्रारंभिक शिक्षा गाँव में ही हुई है, उसके बाद माध्यमिक शिक्षा के लिए वे जयनगर के प्रभात आलोक कोचिंग सेंटर और उच्च विद्यालय जयनगर से पढ़ाई किये। इंटरमीडिएट की पढ़ाई गणितीय विज्ञान से करने के बाद बिहार के प्रतिष्ठित और चर्चित पटना यूनिवर्सिटी के पटना साइंस कॉलेज से गणित में स्नातक किये और तदुपरांत बिहार-झारखंड के प्रतिष्ठित नालंदा खुला विश्विद्यालय से गणित में परास्नातक की पढ़ाई किये हैं। 29 वर्षीय श्री युगल किशोर सिंह महाविद्यालय, विश्विद्यालय और राज्यस्तरीय दर्जनों क्विज और निबंध प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत हो चुके हैं, सफलता के परचम लहरा चुके हैं। पटना के गाँधी मैदान में आयोजित पुस्तक मेला में कई बार काव्य पाठ द्वारा श्रोताओं-दर्शकों को अपने साहित्य सृजन से अवगत करा चुके हैं। लॉकडाउन के बाद से गाँव में आधुनिक कृषि पर ग्रामीणों को वैकल्पिक राह दिखाते हैं। गणित और साहित्य दोनों पर इनका बराबर पकड़ है और ये आम श्रोताओं में “गणितज्ञ कवि” के रूप में उल्लेखित-विभूषित होते हैं। वे वर्तमान में मधुबनी जिला अंतर्गत +2 उच्च विद्यालय में गणित शिक्षक के रूप में सेवा दे रहे हैं, उनका चयन बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित बीपीएससी टीआरई- 02 में टॉप रैंक में हुआ है।
आगे प्रस्तुत है, पुस्तक में प्रकाशित युगल किशोर सिंह ही एक रचना:-
हो पथ पर चलना धर्म हमारा,
रुक जाना अपना कर्म न हो।
हो आगे बढ़ना धर्म हमारा,
गिरकर उठने में शर्म न हो।
हो पथ पर चलना धर्म हमारा —-
हो इच्छा शक्ति प्रबल हमारी,
मन से हम कभी दुर्बल न हो।
हो उड़ जाने का साहस हमारा,
गिर पड़े तो कम विश्वास न हो।
हो पथ पर चलना धर्म हमारा —-
वो जीवन पथ भी आदर्श न हो,
जिसपर चलना संघर्ष न हो।
हो छूना अगर उस अनंत व्योम को,
तो फूलों पर सोने में भी हर्ष न हो।
हो पथ पर चलना धर्म हमारा —-
हो एकलव्य सा विश्वास हमारा,
अभिमन्यु सा साहस भी हो।
बस चलते ही जाना हमको,
जबतक चरणों में अपनी ये अनंत आकाश ना हो।
हो पथ चलना धर्म हमारा,
रुक जाना अपना कर्म ना हो।
-युगल किशोर सिंह

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