
श्यामा नन्द मिश्र की रिपोर्ट | फ्रंट लाइन डेस्क
क्या सही में बिहार में अगले 24 घंटों के अन्दर राजनीतिक भूचाल आने वाला है लालू प्रसाद और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष लल्लन सिंह क्यों चुप्पी साध लिए हैं। चर्चा है कि नीतीश कुमार बिहार में फिर एक बार कोई बड़ा खेला करने जा रहे हैं। क्यों पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी तेज है। कहा तो यही जा रहा है कि नीतीश कुमार फिर पलटी मारने वाले हैं। पिछले एक सप्ताह से तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। कुछ लोग जदयू को दो फांक होने की बात कर रहे हैं तो कुछ लोग तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने की चर्चा कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि बिहार में फिर एक बार भाजपा जदयू गठबंधन की सरकार बनने जा रही है।
यह चर्चा सिर्फ राजनीतिक गलियारों में नहीं मिडिया के बड़े बड़े चैनलों और अखबारों में भी लगातार आ रही है। लेकिन नीतीश कुमार क्या करने जा रहे हैं यह किसी को नहीं पता, जब वे कुछ नया राजनीतिक खेल कर दें तभी कोई अन्दर की बात जान पाते हैं।ऐसा चौंकाने वाला फैसला नीतीश कुमार बिहार में एक बार नहीं कई बार ले चुके हैं। इस बार भी बिहार में कुछ बड़ा होने वाला है वे एक बार फिर अपने फैसले से बिहार बासियों को चौंका सकते हैं जो कोई नहीं जानता वो खेला कर सकते हैं बस थोड़ा और इंतजार कर लें।

दिल्ली की बैठक के चार बिंदु है आइए हम आपको एक एक बताते हैं। पहली बात ये कि संभावना है कि दिल्ली में बड़ी बैठक बुलाकर वे ललन सिंह जो पाटीं के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं उनसे इस्तीफा दिला कर खुद अध्यक्ष बनने जा रहे हैं । पहला कदम नीतीश का ये होगा कि कमान अपने हाथ में ले लेंगे तब कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। इसके एक नहीं कई मायने हैं। पहला ललन सिंह जिन्हें लालू प्रसाद से नजदीकियां अधिक हो गई है उसे कमजोर करना चाहते है।
दुसरा राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद और उनकी पार्टी द्वारा जो नीतीश कुमार पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है कि आप मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़े और तेजस्वी को मौका दें। इस दबाव को खत्म करने और लालू प्रसाद की बोलती बंद करने के लिए बैठक बुलाये हैं।
मतलब साफ है कि नीतीश कुमार स्पष्ट संदेश दिल्ली की बैठक से देना चाहते हैं कि आपलोग मुंह बंद रखें नहीं तो खामियाजा भुगतना पड़ेगा अगर चुप नहीं रहे तो फिर आप लोग हाथ मलते रह जायेंगे और सता का सपना सपना सपना ही रह जायेगा।
ललन सिंह चाहते थे कि नीतीश कुमार सता से हट जाय और केन्द्र की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ायें। इसके लिए वे कितने दिनों से प्रयास रत थे लेकिन इसमें वे सफल नहीं हुए। इधर जदयू के कुछ विधायक जो भाजपा विरोधी माइंड के हैं वे भी राजद के सम्पर्क में थे और कभी भी तख्ता पलट बिहार में हो सकता था। इसकी तैयारी कर ली गई थी। लालू और ललन सिंह के इस राजनीतिक चाल को नीतीश कुमार भांप लिए और उन्होंने सभी सांसदों और विधायकों से एक एक कर सम्पर्क साधना शुरू कर दिया है इन्हें मनाने में लग गए। फिर दिल्ली में बड़ी बैठक बुला ली जो दो दिनों तक चलेगी।

बिहार के इस राजनीतिक हल चल पर भाजपा भला कैसे चुप बैठती केन्द्रीय आलाकमान ने अपने प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी को दिल्ली तलब कर लिया और नसीहत दी कि नीतीश कुमार के विरोध में अभी कुछ दिनों तक वयानवाजी देना बंद रखें । क्योंकि नीतीश कुमार पर सबसे अधिक हमलावर सम्राट चौधरी हीं हैं और उन्होंने पगड़ी बांध कर नीतीश को गद्दी से हटाने का संकल्प ले रखा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीतीश को फिर से एनडीए गठबंधन में लाने के लिए आतुर और वैचैन हैं और मोदी इस घरी का पलक विछाये इंतजार कर रहे हैं।मोदी की लोकसभा के एक एक सीट पर नजर है और उन्हें पता है कि बिहार में नीतीश के बिना क्या होने वाला है। हां भाजपा नीतीश को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर फिर से बैठायेगी इसकी कोई गारंटी नहीं है। इसके लिए उन्हें तरह-तरह का प्रलोभन दिया जा रहा है। नीतीश एक तीर से कई निशाना करना चाहते हैं। पहला लालू प्रसाद और उनके दल के लोगों में भय पैदा कर चुप रहने का संदेश देना चाहते हैं। दुसरा इंडिया गठबंधन जिसका सुत्रधार नीतीश कुमार हीं रहे हैं। इंडिया गठबंधन गठबंधन को बताना चाहते हैं कि नीतीश कुमार की अहमियत को समझो वरना महंगा पड़ेगा।
तीसरा अपनी पार्टी के वैसे नेताओं को चेतावनी व सबक सिखाना चाहते हैं कि अगर दायां बायां किया तो हश्र क्या होगा समझाने की जरूरत नहीं खुद समझ लो। अन्तिम मैसेज नीतीश कुमार भाजपा को इस बैठक के माध्यम से ये देना चाहते हैं कि मैं था तभी 2019 में 40 में 39 सांसद चुनाव जीत कर बिहार से लोकसभा पहुंचा था। 2024 अगर जीतना है तो अदव के साथ आओ बैठो और सम्मान जनक समझौता करो। इंडिया गठबंधन में बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलने के बाद नीतीश ने अपना इरादा बदल लिया है और भाजपा राजद दोनों को ये स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि 2025 तक बिहार में नीतीश को छोड़ और कोई मुख्यमंत्री की कुर्सी की ओर झांकने की कोशिश न करें। बिहार में चल रहे राजनीतिक उथल पूथल और कयासबाजी की असलियत यही है।

नीतीश कुमार ये राजनीतिक खेल तभी खेल पायेंगे जब पाटीं की कमान उनके हाथ में रहेगा। ऐसी स्थिति में न तो लालू प्रसाद और न इंडिया गठबंधन नीतीश का साथ छोड़ना चाहेगा भाजपा भी इस मौके को हाथ से गंवाना नहीं चाहेगी। नीतीश ने पाशा फेंक दिया है अब राजनीति करने वाले लोग राजनीति करते रहे और कयास लगाते रहे। यह भी सच है कि अगर लालू प्रसाद यादव चुप हो गये और इंडिया गठबंधन में नीतीश कुमार को बड़ी जिम्मेदारी या पद मिल गया तो वे कहीं नहीं जाने वाले हैं।
अगर लालू नहीं माने और इंडिया गठबंधन नहीं झुकती तो अगले कुछ दिनों के अन्दर बिहार की राजनीति में भूचाल भी देखने को मिल सकता है। 29 दिसंबर को दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। फिलहाल जदयू को छोड़ सभी राजनीतिक दल और नेता चुप्पी साध रखी है और नीतीश के अगले कदम का इंतजार में है। देखते रहे फ्रंट लाइन 24।

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