
21वीं शताब्दी में विज्ञान-तकनीक की रूपरेखा, गति और शोध कंप्यूटर, मशीनों को अत्याधुनिक बनाए बिना असंभव है। इसी परिप्रेक्ष्य में आज नई प्रौद्योगिकी के रूप में या नई क्रांति के रूप में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता चर्चित हो रहे हैं।
क्या है कृत्रिम बुद्धिमत्ता?
दुनिया तेजी से बदल रही है तो तकनीक भी उसी रूप में बदलने की चेष्टा कर रहा है। बदलते दौड़ में कंप्यूटर के नियंत्रण में भी बदलाव आ रहा है। दरअसल कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर विज्ञान के अंतर्गत एक शाखा या तकनीक है जिसमें स्वनिर्णय, स्वविचार,स्वविश्लेषण व समस्या समाधान की क्षमता,कौशल कृत्रिम रुप से पाई जाती है।ऐसी क्षमताओं का प्रसार व तकनीक जिस रोबोट,मशीन व सॉफ्टवेयर में होती है उसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता युक्त तकनीक कहते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इतिहास क्रम
दरअसल मानव सभ्यता की इतिहास रही है कि वह मौलिक विचार, व्यवहार और विषय केंद्रित रहा है और यही कारण है कि मानव विवेक के बल पर हमेशा ही नवाचारी प्रवृत्ति और प्रकृति का रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शब्द का प्रथम प्रयोग ब्रिटिश कंप्यूटर वैज्ञानिक एलन मैथिसन ट्यूरिंग, ने किया था और आगे अन्य वैज्ञानिक हरबर्ट साइमन ने 1950 के दशक में यह बताया कि कंप्यूटर खुद के स्तर पर किसी भी समस्या में निर्णय ले सकते हैं क्योंकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक के द्वारा उनमें तथ्य,तर्क और विचारों का सामावेशन की जा सकती है,जिससे कंप्यूटर तकनीक में आमूलचूल परिवर्तन संभव है। ध्यातव्य है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से पूर्व कंप्यूटर में सुपर कंप्यूटर का स्थान रहा है, जो की स्मृति एवं निर्णय क्षमता से युक्त था किंतु नए विचार-सृजन क्षमता का उस तकनीक में अभाव था।

किन-किन क्षेत्रों में इस तकनीक का प्रयोग संभव है?
यद्यपि ऐसी तकनीक का प्रयोग आज जीवन से जुड़ी हर एक क्षेत्र में जैसे ऊर्जा, शोध, शिक्षा स्वास्थ्य, परिवहन, कृषि, नवाचार आदि में बड़े पैमाने पर हो सकते हैं। कंप्यूटर,विज्ञान,मनोविज्ञान भाषा विज्ञान, दर्शन, चिकित्सा और समाजशास्त्र, गणित एवं इंजीनियरिंग आदि में इस तकनीक को आने वाले समय में प्रयोग में लाई जा सकती है।
इस तकनीक की चुनौती ?
ऐसी तकनीक जहां मानवीय बुद्धि को चुनौती देगा वहीं यह हमारे दैनिक, प्राकृतिक क्षमता सृजन, कल्पना और श्रम को कमजोर कर हमें तकनीक पर निर्भर बना सकता है मशीनें रोबोट बन जाएगी तो बेरोजगारी और क्रियाशीलता एवं निर्भरता बढ़ेगी। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोध ने यह बताया है कि अगले 2 दशकों में अकेले अमेरिका में डेढ़ लाख रोजगार समाप्त हो जाएंगे यदि ऐसी तकनीक का इस्तेमाल होगा।

क्या है फायदे
हम बड़े बदलाव की ओर रुख कर रहे हैं जहां तकनीक उन्नतशील हो रही है। ऐसे में कृषि,उद्योग और सेवा क्षेत्र भी हाईटेक होते जा रहे हैं। कारण आज की दौड़ की मांग है कि हम तुरंत,स्पष्ट और प्रभावी लाभ, अधिकाधिक आउटपुट की प्राप्ति कर सकें अर्थात विकास जल्द से जल्द क्रियान्वित हो सके। इसी अर्थ में यह तकनीक मानव के श्रम को कम करेगा, समय को कम करेगा और सटीक कार्य-निष्पादन करेगा,त्वरित निर्णय लेकर मानव बुद्धि को मशीनों के द्वारा प्रतिस्थापित करेगा।
भारत में राह
भारत में यह तकनीक जहाँ अपने प्रारंभिक चरण में है वहीं इसके वैश्विक महत्व को देखते हुए उद्योग जगत ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि वह उन क्षेत्रों को पहचाने जहाँ इस तकनीक का उपयोग संभव है। आज भारतीय बाजार में जहां एआई की हिस्सेदारी 7.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर आकलित की गई है वहीं वैश्विक एआई बाजार का आकार 2022 से 2030 तक 38.1% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से विस्तार का अनुमान है |
कुल मिलाकर हम कह सकते हैं यदि सभी तकनीक के अपने पक्ष-विपक्ष और लाभ-हानियाँ संभव है। हालांकि यह भी तथ्य है कि 1970 के दौर में जब पहली बार एटीएम अर्थात स्वचालित टेलर मशीन आई तो लगा की सेवा क्षेत्र में कमी आएगी लेकिन परिणाम उल्टे निकले और स्पष्ट तौर पर यह साबित हो गया की तकनीकीकरण से रोजगार उपलब्धता में कमी नहीं आती बल्कि रोजगार के स्वरूप,तरीके बदल जाते हैं। अतः मानव सभ्यता के इतिहास में यदि ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के विविध पहलुओं पर हम सकारात्मक हल ढूंढ लें तो यह वास्तव में मानव इतिहास और तकनीक में सबसे बड़ी ताकतवर, रोमांचकारी और विश्व की सबसे बड़ी युगांतरकारी घटना व परिवर्त्तन की तकदीर व तस्वीर पेश कर देंगी।

प्रकाश कुमार (स्नातकोत्तर, भौतिकविज्ञान)

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